

बिलासपुर, 22 जुलाई। जिले में बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को बिलासपुर पुलिस द्वारा पुलिस ग्राउंड स्थित बिलासगुड़ी हॉल में जिला स्तरीय बाल संरक्षण हितधारकों की तृतीय अभिसरण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक यूनिसेफ, काउंसेल टू सिक्योर जस्टिस (CSJ) और बिलासपुर पुलिस के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुई।
बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने की। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव अनिल कुमार चौहान तथा काउंसेल टू सिक्योर जस्टिस (CSJ) की वरिष्ठ निदेशक उर्वशी तिलक विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

बैठक में कानून से संघर्ष की स्थिति में आए बच्चों के लिए संचालित ‘दिशांत – नव नभ की ओर’ कार्यक्रम की प्रगति और उपलब्धियों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं काउंसलिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने, नशामुक्ति सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा विद्यालय से बाहर रहने वाले बच्चों के लिए रात्रिकालीन विद्यालय जैसी पहल शुरू करने पर विस्तृत चर्चा हुई। सभी संबंधित विभागों ने इन विषयों पर समन्वित प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की।
एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि बच्चों के समग्र संरक्षण और पुनर्वास के लिए सभी विभागों एवं संस्थाओं के बीच निरंतर सहयोग, समन्वय और साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी हितधारकों से बाल-अनुकूल, संवेदनशील और सशक्त संरक्षण तंत्र विकसित करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक में किशोर न्याय बोर्ड (JJB), बाल कल्याण समिति (CWC), महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, सेंदरी मानसिक चिकित्सालय, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों, एनटीपीसी एवं एसईसीएल के सीएसआर प्रतिनिधियों तथा हस्तक्षेप पुलिस थानों के चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारियों (CWPO) ने भाग लिया।
बैठक के अंत में सभी हितधारकों ने बच्चों की सुरक्षा, पुनर्वास और सकारात्मक विकास के लिए विभागीय समन्वय को और मजबूत बनाने तथा एक प्रभावी एवं समन्वित बाल संरक्षण तंत्र विकसित करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
