

बिलासपुर पूर्व पार्षद प्रत्याशी शंकर दत्ता के साथ हुई ऑनलाइन ठगी के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से उनके हौसले आसमान छू रहे हैं और वे लगातार संपर्क कर और भी अधिक रकम ठगी करने का प्रयास कर रहे हैं।
बिलासपुर हेमूनगर निवासी शंकर दत्ता ने पिछले 15 जुलाई को फेसबुक पर एक मोटरसाइकिल बिक्री का विज्ञापन देखा था। हीरो एचएफ डीलक्स सीजी 11 A 1242 को बेहद कम कीमत पर बेचने का ऑफर दिया गया था। साथ दिए गए नंबर पर संपर्क करने पर कथित विक्रेता ठठारी जांजगीर-चाम्पा निवासी हितेश कर्ष ने खुद को आर्मी मैन और नागपुर में पदस्थ बताया। उसने कहा कि उसकी गाड़ी अच्छी कंडीशन में है और वह इसे बेहद कम कीमत पर बेचना चाहता है। उसने बाकायदा आरसी बुक की कॉपी भी व्हाट्सएप पर भेजी, जिसकी जांच करने पर बाइक हितेश कर्ष के नाम पर ही दर्ज मिली।

अपनी बाइक किसी प्रवीण के हाथों शंकर दत्त के पास भेजने की बात कही गई लेकिन थोड़ी देर बाद ही दोबारा फोन आया कि गाड़ी का जीपीएस रिचार्ज करना पड़ेगा। इस बहाने ₹1000 ऑनलाइन ले लिए गए। फिर तो कभी इस बहाने तो कभी उस बहाने कुल जमा 29 हजार रुपए से अधिक की ऑनलाइन पेमेंट करवा ली गई।
इस बीच लगातार हितेश कर्ष के मोबाइल नंबर 8955 416 223 और प्रवीण के मोबाइल नंबर 9376 723 605 से शंकर दत्ता के पास कॉल आता रहा और वे पैसों की मांग करते रहे। कम कीमत पर अच्छी बाइक पाने की लालच में शंकर दत्ता ने ₹29,000 से भी अधिक की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए लेकिन फिर काफी समय बाद भी जब दूसरी ओर से कोई कॉल नहीं आया तो शंकर दत्त ने दोनों नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया किंतु वे सफल नहीं हो सके।



उसके बाद उन्हें ठगे जाने का एहसास हुआ और उन्होंने साइबर क्राईम ऑफिस के साथ तोरवा थाने में भी इसकी शिकायत दर्ज कर दी। पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया लेकिन अब तक हितेश कर्ष या प्रवीण कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे उनके हौंसले बुलंद हैं और वे लगातार इन्हीं दोनों नंबरों से बार-बार शंकर दत्ता के साथ संपर्क कर उन्हें उनकी रकम लौटाने का झांसा देकर और भी अधिक रकम ठगने का प्रयास कर रहे हैं । कभी उन्हें दिए गए लिंक पर क्लिक करने को कहा जाता है। कभी आधार कार्ड और अन्य डॉक्यूमेंट मांगे जाते हैं, तो कभी बैंक डिटेल भेजने को कहा जाता है। शंकर दत्ता ने बताया कि दोनों ही आरोपियों के मोबाइल नंबर ऑन है और इसके आधार पर पुलिस चाहे तो उनका लोकेशन पता कर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है लेकिन ऐसा न होने से दोनों ही ठग बार-बार शंकर दत्ता को एक बार फिर से अपना शिकार बनाने का प्रयास कर रहे हैं । ऐसे में पुलिस कार्यवाही पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वह ऐसे शातिर अपराधियो पर क्यो मेहरबान है और उन तक कैसे नहीं पहुंच पा रही जो लगातार सक्रिय है ।
आम लोगों में आज भी आर्मी के प्रति सम्मान और विश्वास का भाव है। इसी का फायदा अक्सर ऐसेबठग उठाते हैं। वे स्वयं को आर्मी मैन बताकर अपने घरेलू सामान बेचने ऑफर देते हैं । लोग सस्ते में अच्छा सामान पाने के लालच में उनके झांसे में आ जाते हैं, फिर उनसे इसी तरह बहाने से ठगी कर ली जाती है। शंकर दत्ता भी ऐसे ही ठगो के शिकार बन गए जिन्हें लगता है कि पुलिस ठगो को पड़कर उनकी रकम वापस दिला सकती है लेकिन दूसरी ओर यह डर भी बना हुआ है कि जिस तरह से ठग लगातार सक्रिय है कहीं वे दोबारा शंकर दत्ता को झांसे में लेकर और रकम ना ऐंठ लें, इसलिए पुलिस को चाहिए कि वह दिए गए मोबाइल नंबर का लोकेशन पता कर ऐसे ठगो को जल्द गिरफ्तार करें और सच का पता लगाए ताकि वे किसी और को अपना शिकार न बना सके।
