

बिलासपुर। रेलवे परिक्षेत्र स्थित गुंडिचा मंदिर में सोमवार को हेरा पंचमी का पारंपरिक उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान मां लक्ष्मी पालकी में सवार होकर महाप्रभु जगन्नाथ को खोजते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंचीं। आधी रात तक चले धार्मिक आयोजन में भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी के बीच प्रेम, अधिकार और नाराजगी से जुड़ी प्राचीन परंपरा का भावपूर्ण मंचन किया गया, जिसे देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पंचमी को हेरा पंचमी मनाई जाती है। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी मां के घर गुंडिचा मंदिर चले जाते हैं। पांच दिन बाद माता लक्ष्मी उन्हें खोजते हुए वहां पहुंचती हैं। बिना बताए मौसी मां के घर चले जाने से नाराज माता लक्ष्मी प्रतीकात्मक रूप से महाप्रभु के रथ में तोड़फोड़ कराती हैं और गुप्त मार्ग से वापस मंदिर लौट जाती हैं। इसी परंपरा का सोमवार देर रात तक विधिवत निर्वहन किया गया।
भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
गुंडिचा मंदिर में आयोजित सात दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम के तहत राउरकेला से आई 16 सदस्यीय भजन मंडली ने भगवान जगन्नाथ की महिमा का गुणगान करते हुए मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं समाज के बच्चों और महिलाओं ने शास्त्रीय नृत्य एवं भक्ति गीतों पर आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के बीच भगवान को अर्पित भोग का प्रसाद और खिचड़ी वितरित की गई।
22 जुलाई को निकलेगी इस्कॉन की रथयात्रा
इधर, मंगला स्थित इस्कॉन मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 22 जुलाई को निकाली जाएगी। मंदिर समिति के अनुसार, यात्रा दोपहर 3 बजे बृहस्पति बाजार चौक से प्रारंभ होकर सदर बाजार, गोलबाजार, तेलीपारा, अग्रसेन चौक और सत्यम चौक होते हुए पुनः बृहस्पति बाजार पहुंचेगी। यह रथयात्रा पहले 19 जुलाई को प्रस्तावित थी, लेकिन भारी बारिश के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।
