

लगातार खबरों के बावजूद जनप्रतिनिधि बने मूकदर्शक, बरसात में फिर खुली विकास के दावों की पोल
राजधानी रिपोर्टर / सौरभ साहू की विशेष रिपोर्ट
स्थान: चंदरपुर (ढुढरा), जिला सूरजपुर (छत्तीसगढ़)
दिनांक: 19 जुलाई 2026
सूरजपुर। जिला मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत चंदरपुर (ढुढरा) में विकास के सरकारी दावों की वास्तविक तस्वीर एक बार फिर बरसात के मौसम में सामने आ गई है। वर्षों से सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण आज भी बदहाल व्यवस्था के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। बारिश होते ही गांव की सड़कें कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं, जिससे लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।

सबसे अहम बात यह है कि इस गंभीर समस्या को लेकर हमारे संवाददाता के द्वारा पूर्व में भी इस समाचार को प्रमुखता से उठाते हुए समाचार प्रकाशित किया गया था। उस समय भी ग्रामीणों की समस्याओं और जर्जर सड़क व्यवस्था को उजागर किया गया था। इसके बावजूद न तो जनप्रतिनिधियों ने कोई ठोस पहल की और न ही संबंधित विभाग के अधिकारियों ने स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास किए। बरसात में सामने आई ताजा तस्वीरें यह साबित करती हैं कि विकास के दावे अभी भी धरातल पर उतरते दिखाई नहीं दे रहे हैं।
कीचड़ और गड्ढों से गुजरने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश का पानी भर जाने से सड़क और गड्ढे में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और स्कूली छात्र-छात्राएं रोजाना इसी रास्ते से जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं। कई बार लोग फिसलकर घायल भी हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की चुप्पी अब भी बरकरार है।

नाली के अभाव में बढ़ रहा बीमारी का खतरा
ग्रामीणों का आरोप है कि कई मोहल्लों में आज तक नाली निर्माण नहीं कराया गया। नतीजतन बारिश का पानी सड़कों पर जमा रहता है और पूरे क्षेत्र में कीचड़ फैला रहता है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
स्ट्रीट लाइट नहीं, रात में बढ़ती परेशानी
गांव के कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं होने से रात के समय आवागमन मुश्किल हो जाता है। बरसात के दौरान सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा भी बना रहता है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
क्षेत्रीय विधायक एवं जनप्रतिनिधियों से नाराज ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद गांव की समस्याओं की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत और मांग के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। कुछ ग्रामीणों का यह भी कहना है कि क्षेत्रीय विधायक चुनाव जीतने के बाद गांव की समस्याओं का जायजा लेने नहीं पहुंचे, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वहीं अन्य जनप्रतिनिधियों पर भी केवल आश्वासन देने और ठोस कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
सरकार के विकास मॉडल पर उठ रहे सवाल
एक ओर सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय से सटे गांव की यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। यदि मुख्यालय के समीप बसे गांवों का यह हाल है, तो दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
चदंरपुर (ढुढंरा) के ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
जर्जर सड़क का तत्काल निर्माण एवं मरम्मत।
सभी मोहल्लों में पक्की नाली का निर्माण।
खराब एवं बंद स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत एवं नई लाइटें लगाई जाएं।
जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए। संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करें और स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।
अब सबसे बड़ा सवाल. यह उठता है।।
लगातार समाचार प्रकाशित होने, शिकायतें किए जाने और ग्रामीणों द्वारा बार-बार आवाज उठाने के बावजूद यदि हालात नहीं बदलते, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या प्रशासन, पंचायत और जनप्रतिनिधि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?
जहां इस बरसात के साथ एक बार फिर चंदरपुर (ढुढरा) की बदहाल सड़कें विकास के दावों की सच्चाई उजागर कर रही हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस बार केवल आश्वासन तक सीमित रहते हैं या वास्तव में ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं।।
