

बिलासपुर।
बिना संस्कार नहीं सहकार, और बिना सहकार नहीं उद्धार।” यह सूक्ति भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था में सहकारिता के महत्व को पूरी तरह परिभाषित करती है। ‘सहकार’ का अर्थ है – मिल-जुलकर काम करना। जब समाज का हर वर्ग, विशेषकर ग्रामीण और वंचित वर्ग, एक समान उद्देश्य के लिए एकजुट होकर प्रयास करता है, तो वह सहकारिता बन जाता है। भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न इसी दर्शन पर आधारित है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर राष्ट्र का विकास करना है।
उक्त उदगार आज बिलासपुर नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड द्वारा सहकारिता दिवस पर आयोजित सहकारिता संगोष्ठी एवं सहकारी विभूतियों के सम्मान समारोह में उपस्थित अतिथि सर्वश्री बैजनाथ चंद्राकर पूर्व अध्यक्ष अपेक्स बैंक, मंगत राय अग्रवाल पूर्व अध्यक्ष बिलासपुर भूमि विकास बैंक,श्री मुरली धर शर्मा पूर्व संचालक जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बिलासपुर और श्री शेखर मुदलियार अध्यक्ष बिलासपुर सहकारी गृहनिर्माण समिति ने व्यक्त की।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बिलासपुर नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने सहकारिता की दशा और दिशा पर कहा कि नई पीढ़ी को सहकारिता से जोड़ने और उससे होने वाले लाभ को बताना जरूरी है ताकि वे सहकारिता के माध्यम से किसान, महिलाये और ग्रामीण जनजीवन खुशहाल हो सके।
समारोह की शुरुआत बैंक के संचालक मनोज भंडारी के स्वागत भाषण से हुआ। इस अवसर पर श्री बैजनाथ चंद्राकर, श्री मंगत राय अग्रवाल, श्री मुरली धर शर्मा,श्री अशोक अग्रवाल,श्री शेखर मुदलियार का शाल श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर उपाध्यक्ष श्रीमती शशि सिंह, संचालकगण सर्वश्री नारायण आवटी, अनिल खण्डेलवाल, मनोज भंडारी,कुमारी अलका शर्मा, डा सोमनाथ यादव,बबलू पमनानी, बी बी अग्रवाल, सीताराम जायसवाल, टी मोइत्रा, एम डी दुर्जती मुखर्जी, शुभम मित्तल ने सम्मानित किया।
समारोह का संचालन संचालक डा सोमनाथ यादव ने तथा आभार व्यक्त कुमारी अलका शर्मा ने की। इस अवसर पर सर्व श्री नथमल शर्मा, पी आर यादव, रामशरण यादव, प्रमोद नायक,डा तरू तिवारी, लक्ष्मी नारायण शर्मा, मोहन पुजारी, राजेंद्र ठाकुर, अशफाक हुसैन, श्री नारायण तिवारी, श्याम नारायण गुप्ता, अर्जुन सिंग, अलका चौपड़े, सोमेश सूबेदार आदि गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
