
बिलासपुर। कोटा स्थित सीएनआई चर्च की नई कमेटी के पास्टर सहित सात पदाधिकारियों के खिलाफ एक परिवार का कथित सामाजिक बहिष्कार करने, मानसिक प्रताड़ना देने और सोशल मीडिया के माध्यम से परिवार से संबंध नहीं रखने का संदेश प्रसारित करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के आदेश पर कोटा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला कोटा के मिशन कंपाउंड स्थित सीएनआई चर्च से जुड़ा है। शिकायतकर्ता हरीश लाल ने आरोप लगाया है कि चर्च की नई कमेटी के पदाधिकारियों ने उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर मानसिक प्रताड़ना दी। आरोप है कि सोशल मीडिया पर संदेश प्रसारित कर लोगों से अपील की गई कि वे परिवार से किसी प्रकार का संपर्क न रखें और उनके सुख-दुख में भी शामिल न हों।
शिकायत के अनुसार पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने पर हरीश लाल ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीप्ति बरवा की अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए कोटा पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने सौरभ पीटर्स, राजा सालोमान दास, अनिल मसीह, थियोडोर पीटर्स, सुनीलेश पीटर्स, सुलेमान दास और पास्टर मनीष आर. मसीह के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्रिसमस और ईस्टर का अपमान करने का लगाया आरोप
हरीश लाल का कहना है कि नई कमेटी बनने के बाद पिछले दो वर्षों से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके अनुसार 17 जनवरी को चर्च परिसर में आयोजित बैठक में उन पर क्रिसमस और ईस्टर जैसे धार्मिक पर्वों का अपमान करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद उन्हें और उनके परिवार को ‘नॉट इन गुड स्टैंडिंग’ घोषित कर सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया।
बिशप के आदेश की भी अनदेखी का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़, रायपुर के बिशप ने स्पष्टीकरण जारी कर इस बहिष्कार को अवैध और असंवैधानिक बताया था, लेकिन इसके बावजूद चर्च कमेटी ने आदेश का पालन नहीं किया। हरीश लाल का यह भी आरोप है कि आरोपियों ने मिशन कंपाउंड स्थित उनके कार गैरेज के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया, जिससे उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।
पुलिस का कहना है कि न्यायालय के निर्देशानुसार मामला दर्ज कर लिया गया है और सभी आरोपों की जांच की जा रही है।
