
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस के एआई आधारित फेस रिकग्निशन टूल ‘त्रिनयन’ को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम तेज हो गया है। बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग की निगरानी में एप में नए फीचर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे फील्ड पुलिसिंग को और मजबूत बनाने के साथ संदिग्धों की पहचान और निगरानी अधिक तेज व सटीक हो सकेगी।
त्रिनयन एप किसी संदिग्ध, लावारिस शव या गुमशुदा व्यक्ति की फोटो लेते ही उसका मिलान राज्य के अपराधियों और गुमशुदा लोगों के डेटाबेस से करता है। डेटाबेस में शातिर अपराधियों, वारंटियों और जेल से छूटे कैदियों की फोटो, फिंगरप्रिंट तथा अपराध संबंधी रिकॉर्ड मौजूद हैं। चेहरा मैच होते ही संबंधित व्यक्ति की पहचान और उसका आपराधिक रिकॉर्ड तुरंत मोबाइल स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाता है। एप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा तथा राज्य और राष्ट्रीय अपराध डेटाबेस के समन्वय से कार्य करता है।
जियो-टैगिंग से संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर
एप के माध्यम से संदिग्धों और हिस्ट्रीशीटरों की जांच के दौरान उनकी लोकेशन जियो-टैग हो जाती है। इससे वरिष्ठ अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय संदिग्धों की जानकारी मिलती रहती है। ऑपरेशन मुस्कान और तलाश जैसे अभियानों में भी त्रिनयन एप पुलिस के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।
कैमरों से लाइव अलर्ट और ऑफलाइन पहचान पर काम
आईजी रामगोपाल गर्ग ने बताया कि भविष्य में एप में कई नई सुविधाएं जोड़ी जा सकती हैं। इसके तहत शहरों के इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस), रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के सीसीटीवी कैमरों से त्रिनयन को जोड़ने की योजना है। इससे कोई वांछित अपराधी कैमरे की जद में आते ही कंट्रोल रूम को स्वतः अलर्ट मिल सकेगा।
नेटवर्क की समस्या वाले बस्तर सहित वनांचल क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए ऑफलाइन सिंकिंग मोड भी विकसित किया जा रहा है, ताकि इंटरनेट उपलब्ध नहीं होने पर भी मोस्ट वॉन्टेड अपराधियों की प्राथमिक पहचान संभव हो सके।
आवाज और फिंगरप्रिंट से भी होगी पहचान
पुलिस ऐसे मामलों के लिए भी तकनीक विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जहां अपराधी अपना हुलिया बदल लेते हैं। प्रस्तावित फीचर्स में फेशियल रिकग्निशन के साथ वॉयस रिकग्निशन और मोबाइल स्क्रीन के माध्यम से फिंगरप्रिंट स्कैनिंग की सुविधा भी शामिल है।
दूसरे राज्यों के डेटाबेस से होगा समन्वय
पुलिस की योजना त्रिनयन एप को पड़ोसी राज्यों ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के पुलिस सिस्टम तथा केंद्रीय अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क (सीसीटीएनएस) से रीयल-टाइम सिंक करने की भी है। इससे राज्य की सीमा पार करने वाले अपराधियों का पता लगाने में आसानी होगी।
बीट स्तर तक स्मार्टफोन और प्रशिक्षण की जरूरत
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि त्रिनयन का अधिकतम लाभ तभी मिल सकेगा, जब प्रत्येक आरक्षक को उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे से लैस सरकारी स्मार्टफोन उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही बीट स्तर तक पुलिस कर्मियों को एप के प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की भी आवश्यकता बताई गई है।
