

बिलासपुर। रेलवे क्षेत्र स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में 30वें रथोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। महास्नान के बाद परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ इन दिनों अनसर (अस्वस्थ) काल में हैं। इस दौरान मंदिर के मुख्य पुजारी प्रतिदिन भगवान की जड़ी-बूटियों के काढ़े और पुरी से मंगाए गए विशेष औषधीय तेल से सेवा कर रहे हैं। वहीं रथ निर्माण और सजावट का कार्य भी तेज़ी से चल रहा है।

मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष रथोत्सव को विशेष भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। रथ की सजावट के लिए लाल, पीले, हरे और काले रंग के पारंपरिक वस्त्र पुरी से मंगाए गए हैं। इन्हीं कपड़ों से रथ को आकर्षक और पारंपरिक स्वरूप दिया जाएगा। इसके साथ ही भगवान जगन्नाथ का स्वर्ण श्रृंगार भी किया जाएगा, जिसके लिए स्वर्ण आभूषण और मुकुट पुरी से मंगाए जा रहे हैं।
इस बार वर्षों बाद भगवान के रथ को खींचने वाली रस्सी भी बदली जाएगी। वहीं छेरापहरा की रस्म सोने की जरी लगी विशेष झाड़ू से निभाई जाएगी। मंदिर समिति ने बताया कि रेलवे क्षेत्र स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की स्थापना 26 नवंबर 1996 को हुई थी। स्थापना के बाद एक बार मंदिर की प्रतिमाएं बदली जा चुकी हैं। समिति का उद्देश्य पुरी की परंपरा के अनुरूप बिलासपुर में ही श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ के दर्शन और रथोत्सव का अनुभव कराना है।
रथ रहेगा मौसी मां मंदिर के बाहर

हर वर्ष रथयात्रा के बाद भगवान का रथ मौसी मां मंदिर परिसर के अंदर रखा जाता था, लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए रथ को मंदिर के बाहर रखा जाएगा, ताकि अधिक से अधिक भक्त उसके दर्शन कर सकें।
14 जुलाई को नेत्रोत्सव, 16 को रथयात्रा
रथोत्सव के कार्यक्रमों के अनुसार 14 जुलाई को नेत्रोत्सव के अवसर पर भगवान भक्तों को दर्शन देंगे। 15 जुलाई को रथ की प्राण-प्रतिष्ठा होगी, जबकि 16 जुलाई को दोपहर 2 बजे मंदिर से भव्य रथयात्रा निकलेगी। यात्रा से पहले छेरापहरा की पारंपरिक रस्म अदा की जाएगी, जिसे एसईसीएल के डायरेक्टर (टेक्निकल, पी एंड पी) रमेशचंद्र मोहपात्रा निभाएंगे। 24 जुलाई को भगवान की बहुणा यात्रा निकाली जाएगी।

30 वर्ष पुराना रथ, हर साल होती है नई सजावट
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान रथ का निर्माण 30 वर्ष पहले पुरी के कारीगरों ने किया था। हर वर्ष रथ के कपड़े, ध्वज और रंग-रोगन बदले जाते हैं। भगवान जगन्नाथ को पीला, बलभद्र को हरा और सुभद्रा को लाल रंग प्रिय माना जाता है, इसलिए रथ की सजावट भी इन्हीं रंगों के अनुरूप की जाती है। रथयात्रा के समापन के बाद विधिवत पूजा-अर्चना कर रथ को खोलकर उसके सभी हिस्सों को सुरक्षित रख दिया जाता है।
