
बिलासपुर। ने राज्य शासन द्वारा स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका फिलहाल खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित आदेश का स्कूलों में पालन शुरू हो चुका है। ऐसे में इस स्तर पर न्यायालय के हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
यह याचिका पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने दायर की थी। याचिका में राज्य शासन के आदेश को संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने माना कि अभी तक यह सिद्ध नहीं हुआ है कि किसी स्कूल में आदेश का पालन कराया जा रहा है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में राहत प्रदान नहीं की जा सकती।
हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को भविष्य में दोबारा याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी है। अदालत ने कहा कि यदि किसी विद्यालय में आदेश के पालन के ठोस साक्ष्य, जैसे वीडियो, दस्तावेज या अन्य प्रमाण उपलब्ध होते हैं, तो उन्हें रिकॉर्ड के साथ नई याचिका प्रस्तुत की जा सकती है।
इस फैसले के बाद फिलहाल स्कूलों में मंत्रोच्चार के मुद्दे पर राज्य शासन के आदेश के खिलाफ कानूनी चुनौती टल गई है। हालांकि, यदि भविष्य में आदेश के क्रियान्वयन के प्रमाण सामने आते हैं, तो यह मामला एक बार फिर अदालत के समक्ष पहुंच सकता है।
