

बिलासपुर। शहर के गुरु नानक चौक के आसपास का इलाका इन दिनों एक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति के आतंक से परेशान है। राजू उर्फ शत्रुघ्न नामक यह व्यक्ति आए दिन राह चलते लोगों से विवाद करता है और कई बार मारपीट जैसी घटनाओं को भी अंजाम दे चुका है। गुरुवार सुबह उसने गुरु नानक चौक स्थित लाइफ केयर अस्पताल में घुसकर जमकर उत्पात मचाया, जिससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुरुवार सुबह राजू अचानक लाइफ केयर अस्पताल में घुस आया और वहां मौजूद मरीजों एवं कर्मचारियों के सामने अश्लील गाली-गलौज करने लगा। इसी दौरान डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए प्रतीक्षारत मरीजो से भी वह उलझने लगा। स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल के सुरक्षा गार्ड ने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन इससे वह और अधिक उग्र हो गया।

गुस्से में आकर राजू ने अपने हाथ में मौजूद पत्थर से अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के टफन ग्लास पर जोरदार हमला कर दिया। पत्थर लगते ही महंगा शीशे वाला दरवाजा चकनाचूर हो गया। इसके बाद भी वह नहीं रुका और लगातार पत्थर उठाकर वहां मौजूद लोगों की ओर फेंकने तथा हमला करने का प्रयास करता रहा।



अचानक हुए इस हमले से अस्पताल में मौजूद मरीज, उनके परिजन और कर्मचारी भयभीत हो गए। घटना की सूचना तत्काल तोरवा थाना पुलिस और डायल 112 को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि राजू द्वारा इस तरह का उत्पात कोई नई बात नहीं है।

जानकारी के अनुसार राजू उर्फ शत्रुघ्न लंबे समय से मानसिक बीमारी से ग्रसित है। उसे पूर्व में कई बार पकड़कर सेंदरी स्थित मानसिक चिकित्सालय भेजा जा चुका है, लेकिन हर बार उसके परिजन, विशेषकर उसकी मां और बहन, उसे वापस घर ले आती हैं। आरोप है कि घर लाने के बाद भी उसकी उचित निगरानी नहीं की जाती, जिसके कारण वह दिनभर गुरु नानक चौक क्षेत्र में घूमता रहता है और राहगीरों से उलझता रहता है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिनों पहले उसने एक महिला राहगीर के साथ भी मारपीट की थी। इसके अलावा वह अक्सर ऑटो स्टैंड पर खड़े चालकों से विवाद करता है और कई बार हाथापाई तक की नौबत आ जाती है। क्षेत्र के व्यापारियों और नागरिकों में उसके व्यवहार को लेकर लगातार भय बना हुआ है।

पुलिस का कहना है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण उसके खिलाफ सामान्य आपराधिक कार्रवाई करना आसान नहीं है। पुलिसकर्मी जब भी उसे पकड़ने का प्रयास करते हैं, वह उन पर भी हमला करने लगता है। वहीं यदि उसे पकड़कर मानसिक चिकित्सालय भेजा जाता है तो वहां की प्रक्रिया और अन्य कारणों से उसे लंबे समय तक रखना संभव नहीं हो पाता और वहां के चिकित्सक भी खास सहयोग नहीं करते।

गुरुवार को अस्पताल में हुई घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पत्थर किसी व्यक्ति को लग जाता या टूटे हुए शीशे से कोई गंभीर रूप से घायल हो जाता तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब राजू का व्यवहार पूरी तरह खतरनाक हो चुका है और उससे किसी भी समय किसी की जान-माल को नुकसान पहुंच सकता है।

क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि राजू उर्फ शत्रुघ्न का समुचित मानसिक उपचार सुनिश्चित किया जाए तथा उसे किसी सुरक्षित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में भर्ती कराकर निगरानी में रखा जाए, ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। अब देखना होगा कि इस घटना के बाद प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।

