

बिलासपुर। शहर और जिले की सड़कों पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर यातायात पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। अत्याधुनिक कैमरों, एएनपीआर सिस्टम, इंटरसेप्टर वाहन और स्पीड राडार गन की मदद से यातायात नियम तोड़ने वालों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जनवरी से मई 2026 के बीच तेज गति और खतरनाक वाहन संचालन के कुल 14,372 प्रकरण दर्ज कर वाहन चालकों को नोटिस जारी किए गए हैं।

पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे के पर्यवेक्षण में यह अभियान चलाया जा रहा है। यातायात पुलिस के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में तेज गति, लापरवाही और नशे की हालत में वाहन चलाना शामिल है। इसी को देखते हुए जिले में विशेष निगरानी और सख्त कार्रवाई की जा रही है।

शहर में आईटीएमएस के तहत 550 से अधिक अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए हैं, जो प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहों और आंतरिक सड़कों पर वाहनों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। कैमरों के जरिए तय गति सीमा से अधिक रफ्तार, स्टंटबाजी, खतरनाक ड्राइविंग, वाहन चलाते समय रील बनाने और अन्य यातायात उल्लंघनों का पता लगाकर ऑनलाइन चालान जारी किए जा रहे हैं।
यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से मई तक मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 112/183 के तहत तेज गति से वाहन चलाने के 4,809 मामले दर्ज किए गए, जबकि धारा 184 के तहत जल्दबाजी और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने के 9,567 प्रकरण बनाए गए। इस तरह कुल 14,372 मामलों में कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जोखिमपूर्ण तरीके से वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ केवल चालान ही नहीं, बल्कि उनके ड्राइविंग लाइसेंस के निलंबन और निरस्तीकरण की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। ऐसे मामलों की रिपोर्ट लगातार परिवहन विभाग को भेजी जा रही है।

यातायात पुलिस ने वाहन चालकों को चेतावनी दी है कि सड़क पर स्टंटबाजी, रील बनाने या तेज रफ्तार से वाहन चलाकर दूसरों की जान जोखिम में डालने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में प्रकरण न्यायालय भेजे जा रहे हैं, जहां दोषियों को अधिकतम दंड भी मिल सकता है।
यातायात पुलिस का संदेश है— गति पर नियंत्रण रखें, क्योंकि अब बिलासपुर की सड़कों पर हर गतिविधि तीसरी आंख की निगरानी में है।
