

बिलासपुर। नेहरू नगर स्थित छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर कब्जे और सामुदायिक भवन तोड़े जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर अवनीश शरण ने पूरे प्रकरण की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों से करीब 80 लाख रुपए के नुकसान की वसूली करने के निर्देश दिए हैं।
कमिश्नर ने 5 जून को कलेक्टर बिलासपुर को 15 बिंदुओं पर पत्र भेजकर मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि नियमों की अनदेखी करते हुए करीब 40 लाख रुपए मूल्य के 60 वर्ष पुराने सामुदायिक भवन को तोड़ दिया गया, जिससे हाउसिंग बोर्ड को भारी नुकसान हुआ।
हाउसिंग बोर्ड के अनुसार, वर्ष 1966 में 14.55 एकड़ भूमि सहकारी समिति से खरीदी गई थी, जबकि 8.31 एकड़ भूमि शासन द्वारा अधिग्रहित कर बोर्ड को उपलब्ध कराई गई थी। इसके बावजूद राजस्व अभिलेखों और आदेशों के आधार पर जमीन संबंधी विवाद खड़ा हो गया।
कमिश्नर ने स्थानीय राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी ने मूल भूमि स्वामी छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को नोटिस दिए बिना और उसका पक्ष सुने बिना एकतरफा आदेश पारित कर दिया। इसी आदेश के आधार पर 2 जून को कुदुदंड निवासी मोहम्मद अली के कथित संरक्षण में कुछ लोगों ने सामुदायिक भवन को तोड़ना शुरू कर दिया।
पत्र में यह भी कहा गया है कि भू-माफिया के पक्ष में भ्रामक रिपोर्ट तैयार की गई। ऐसे अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर उनके खिलाफ विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही मानसेवी गृह निर्माण समिति और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड को एक ही संस्था दर्शाते हुए दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की गई है।
मामले में हाउसिंग बोर्ड के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन ने भी कार्रवाई की है। सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत ने अपने पूर्व आदेश पर 2 जून को ही स्थगन (स्टे) लगा दिया। वहीं हाउसिंग बोर्ड की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अब हाउसिंग बोर्ड द्वारा उठाए गए सवालों और कमिश्नर के निर्देशों के बाद इस पूरे मामले में राजस्व अधिकारियों की भूमिका, भूमि स्वामित्व और भवन ध्वस्तीकरण की वैधता की जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
