
बिलासपुर। देशभर में परीक्षा सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) में समर्थ पोर्टल से जुड़े संभावित डेटा लीक का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर मई 2026 की परीक्षाओं के कुछ प्रश्नपत्र समर्थ पोर्टल के लिंक के साथ प्रसारित होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आशंका जताई जा रही है कि यदि पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगी है तो विश्वविद्यालय के 32 विभागों से जुड़े प्रश्नपत्रों के साथ अन्य गोपनीय दस्तावेज भी प्रभावित हो सकते हैं।
मामले की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ गई है क्योंकि समर्थ पोर्टल पर केवल परीक्षा संबंधी जानकारी ही नहीं, बल्कि प्रवेश प्रक्रिया, वित्तीय रिकॉर्ड, प्रशासनिक दस्तावेज, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं भी उपलब्ध रहती हैं। ऐसे में यदि किसी अनधिकृत व्यक्ति ने पोर्टल तक पहुंच बनाई है तो डेटा सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि समिति के गठन के 24 घंटे बाद तक जांच प्रक्रिया शुरू नहीं होने की जानकारी सामने आई है। इसी बीच शनिवार को आयोजित अंतिम परीक्षा का प्रश्नपत्र एहतियातन बदले जाने की चर्चा भी रही।
सीयू की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (एमएफए), ओटीपी आधारित सत्यापन, एन्क्रिप्टेड एक्सेस और लॉग मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं जरूरी होती हैं। जांच में यह स्पष्ट होगा कि मामला पोर्टल हैकिंग का है, किसी यूजर आईडी-पासवर्ड के दुरुपयोग का या फिर मानवीय चूक का।
सीयू के मीडिया सेल प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कुछ प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह जांच की जा रही है कि कितने विभागों के कितने प्रश्नपत्र प्रभावित हुए हैं। समर्थ पोर्टल हैक हुआ है या किसी आईडी-पासवर्ड के जरिए जानकारी बाहर गई है, इसका पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
वहीं समर्थ पोर्टल के समन्वयक मनोज कुमार ने बताया कि दिल्ली स्थित समर्थ टीम से संपर्क मुख्य रूप से ई-मेल के माध्यम से होता है और कोई स्थानीय समन्वयक उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, सह-समन्वयक कपिल नागवंशी भी दिल्ली टीम के संपर्क नंबर उपलब्ध नहीं करा सके।
जांच समिति के संयोजक डॉ. एस.सी. श्रीवास्तव बनाए गए हैं। समिति में प्रॉक्टर प्रो. मुकेश कुमार सिंह, प्रो. खेमचंद देवांगन, डेवलपमेंट ओएसडी प्रो. भारती अहिरवार तथा एकेडमिक असिस्टेंट रजिस्ट्रार टी.पी. सिंह को सदस्य बनाया गया है। हालांकि समिति के सदस्यों से संपर्क नहीं हो सका, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि कुछ सदस्य अवकाश पर हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार जांच टीम सर्वर लॉग, एडमिन पैनल एक्सेस और यूजर गतिविधियों की पड़ताल करेगी। यह जांच की जाएगी कि दस्तावेज कब अपलोड किए गए, कितनी बार एक्सेस हुए और किन-किन यूजर अकाउंट से डाउनलोड किए गए। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं किसी कर्मचारी द्वारा आईडी-पासवर्ड साझा तो नहीं किए गए, कोई फिशिंग अटैक हुआ या कैंपस नेटवर्क के जरिए क्रेडेंशियल्स लीक तो नहीं हुए।
इधर शनिवार को आयोजित अंतिम परीक्षा के प्रश्नपत्र को कथित तौर पर अंतिम समय में बदलने की भी चर्चा रही। बताया जा रहा है कि एक छात्र ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. संपूर्णानंद झा और गोपनीय शाखा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी अमितेश झा को मामले से जुड़ी जानकारी दी थी, जिसके बाद एहतियातन नया प्रश्नपत्र तैयार किया गया। हालांकि परीक्षा नियंत्रक कार्यालय और गोपनीय शाखा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार जांच समिति दिल्ली स्थित समर्थ कोर इंजीनियरिंग टीम से यूजर लॉगिन ऑडिट लॉग्स भी मंगाएगी। इन लॉग्स के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि कथित रूप से लीक हुई आईडी और पासवर्ड का उपयोग किस आईपी एड्रेस और किस स्थान से किया गया। फिलहाल जांच शुरू होने से पहले ही विश्वविद्यालय की साइबर सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
