
शशि मिश्रा

तारबाहर खुदीराम बोस चौक और उसके आसपास का इलाका इन दिनों नकली सोने के एक संगठित गोरखधंधे को लेकर चर्चाओं में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिलासपुर में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो खुद को गरीब और जरूरतमंद बताकर ज्वेलर्स तथा गोल्ड फाइनेंस कंपनियों को लाखों रुपए की चपत लगा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस कथित नकली सोने को पहली नजर में पहचान पाना बेहद मुश्किल बताया जा रहा है। यहां तक कि कई अनुभवी सुनार भी शुरुआती जांच में इसे असली समझ बैठते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में लगातार उछाल के बीच जहां प्रधानमंत्री Narendra Modi लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक सोना खरीदने से बचने की अपील कर चुके हैं, वहीं बिलासपुर में नकली सोने के जरिए ठगी का यह खेल तेजी से फैलता नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार गिरोह के सदस्य उत्तर प्रदेश और बिहार से बिलासपुर पहुंचते हैं और दावा करते हैं कि उनके पास पैतृक सोना है, जिसके कोई दस्तावेज या बिल मौजूद नहीं हैं।

गरीबों जैसा हुलिया, करोड़ों की ठगी का खेल

सूत्र बताते हैं कि यह लोग बेहद साधारण और गरीबों जैसा हुलिया बनाकर सराफा कारोबारियों के पास पहुंचते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें किसी पारिवारिक या आर्थिक संकट के कारण तत्काल रकम की जरूरत है और उनके पास केवल खानदानी सोना ही गिरवी रखने के लिए उपलब्ध है।
चूंकि सोने की कीमत वर्तमान में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है और 24 कैरेट सोना एक लाख 11 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम से अधिक में बिक रहा है, इसलिए बड़ी मात्रा में सोना देखकर कई कारोबारी लालच में आ जाते हैं। उन्हें लगता है कि गरीब परिवार बाद में सोना छुड़ा नहीं पाएगा और अंततः गिरवी रखा गया सोना उनके पास ही रह जाएगा।
लेकिन यही सोच इन ठगों का सबसे बड़ा हथियार बन जाती है। वे असली जैसे दिखने वाले नकली सोने के बदले लाखों रुपए का लोन हासिल कर लेते हैं और फिर कभी वापस नहीं लौटते।
पिघलाने पर खुलता है राज
बताया जा रहा है कि इस कथित नकली सोने की बनावट इतनी बारीक होती है कि सामान्य जांच में यह असली प्रतीत होता है। असलियत तब सामने आती है, जब उसे पिघलाया जाता है। कई मामलों में एक साल बाद, जब ज्वेलर्स गिरवी रखे गए सोने को अपने कब्जे में लेकर उसे प्रोसेस करते हैं, तब जाकर ठगी का खुलासा होता है। तब तक आरोपी लाखों रुपए लेकर गायब हो चुके होते हैं।

त्योहार के दौरान सामने आया बड़ा मामला
सूत्रों के अनुसार तारबाहर क्षेत्र में रहने वाले कुछ लोगों ने एक स्थानीय व्यापारी से संपर्क कर बड़ी रकम की आवश्यकता बताई। उन्होंने दावा किया कि उनके पास पैतृक सोना है, लेकिन उसका कोई बिल या दस्तावेज नहीं है और मुथूट फाइनेंस जैसे गोल्ड फाइनेंस कंपनी उन्हें सही कीमत नहीं दे रही व्यापारी ने उन्हें अपने परिचित एक ज्वेलर के पास भेज दिया।
उस समय त्योहार होने के कारण ज्वेलर्स के कई कर्मचारी छुट्टी पर थे। शुरुआती जांच में सोना असली प्रतीत हुआ और करीब 10 लाख रुपए देकर सोना खरीद लिया गया।

लेकिन चार दिन बाद जब कर्मचारी लौटे और दोबारा जांच की गई, तब पता चला कि पूरा सोना नकली है। इसके बाद संबंधित लोगों से पूछताछ की गई तो उन्होंने पहले अनभिज्ञता जताई और दावा किया कि उन्हें भी असली-नकली की जानकारी नहीं थी। बाद में मामला पुलिस तक पहुंचने की आशंका बढ़ी तो रकम लौटाने की बात कही गई।
सूत्रों का दावा है कि आरोपियों ने आधी रकम वापस भी की, लेकिन इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें वही नकली सोना वापस दे दिया जाए तो वे उसे कहीं और बेचकर बाकी रकम चुका देंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई एकबारगी घटना नहीं बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क हो सकता है।
गोल्ड फाइनेंस कंपनियां भी निशाने पर
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि कई निजी गोल्ड फाइनेंस कंपनियां भी इस गिरोह के निशाने पर हैं। आरोप है कि लक्ष्य पूरा करने के दबाव में कुछ कर्मचारी बिना पर्याप्त दस्तावेज और गहन जांच के ही भारी रकम का लोन जारी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की लापरवाही जारी रही तो भविष्य में निजी वित्तीय संस्थानों को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका असर निवेशकों और आम ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।
नकली हीरे-जवाहरात तक का शक
सूत्रों के मुताबिक यह नेटवर्क केवल नकली सोने तक सीमित नहीं हो सकता। आशंका जताई जा रही है कि नकली हीरे और जवाहरात के जरिए भी लोगों को ठगा जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि आम ग्राहक वर्षों तक यह समझ ही नहीं पाता कि उसने जो आभूषण खरीदा है, वह असली है या नकली।
पुलिस के सूचना तंत्र पर सवाल
इतने बड़े स्तर पर कथित फर्जीवाड़ा सामने आने के बावजूद अब तक कोई बड़ी पुलिस कार्रवाई सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय करे और तारबाहर क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखे तो एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। बताते हैं कि नकली सोना के अलावा यह लोग नशीले पदार्थों का भी कारोबार करते हैं। बहुत संभव है कि इस तरह से अर्जित आय से किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने का षड्यंत्र रचा जा रहा हो।
सूत्रों का दावा है कि इस नेटवर्क के तार केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और बांग्लादेश तक फैले हो सकते हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
फिलहाल यह मामला शहर के सराफा कारोबारियों, गोल्ड फाइनेंस कंपनियों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि समय रहते इस पूरे नेटवर्क की गंभीर जांच नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में करोड़ों रुपए की ठगी और बड़े आर्थिक अपराध सामने आ सकते हैं।
