

बिलासपुर। लगातार गिरते भूजल स्तर और हर साल गहराते पेयजल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य करने का फैसला लिया है। नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव आर. संगीता ने बुधवार को आदेश जारी कर सभी कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों और नगर पालिका अधिकारियों को 15 जून 2026 तक मिशन मोड में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार के आदेश के अनुसार शासकीय, अर्द्धशासकीय और निजी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। इसमें सरकारी कार्यालय, आवासीय परिसर, निजी कॉलोनियां, अस्पताल, स्कूल, व्यावसायिक भवन और औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं।
विभाग का कहना है कि हर साल गर्मी के दौरान भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे शहरों में पानी का संकट बढ़ता जा रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री स्तर पर यह निर्णय लिया गया है।
उद्यान, बोरवेल और हैंडपंपों के पास भी बनेंगे रिचार्ज पिट
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि भवनों के अलावा उद्यानों, बोरवेल और हैंडपंपों के आसपास भी रिचार्ज पिट बनाए जाएं। मानसून से पहले जल पुनर्भरण की व्यवस्था पूरी करने पर जोर दिया गया है ताकि बारिश का पानी सीधे जमीन में पहुंच सके और भूजल स्तर में सुधार हो।
सभी नगर निकायों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। दो महीने बाद यह मूल्यांकन किया जाएगा कि कितनी नई संरचनाएं बनीं और बारिश के बाद भूजल स्तर में कितना सुधार आया। संचालनालय स्तर पर मुख्य अभियंता राजेश शर्मा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
शहर में 40 से 50 हजार बड़े भवन, लेकिन सिस्टम सिर्फ 3717 में
नगर निगम सीमा में कुल 1 लाख 29 हजार 9 मकान दर्ज हैं। नियम के अनुसार 150 वर्गमीटर यानी करीब 1600 वर्गफीट से बड़े भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी है। अनुमान के मुताबिक शहर में ऐसे 40 से 50 हजार भवन हैं, लेकिन अब तक केवल 3717 भवनों में ही सिस्टम लगाया गया है।
सरकारी भवनों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। वर्ष 2011 के बाद बने भवनों में सिर्फ 254 शासकीय भवनों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मौजूद है।
वर्ष 2019 से अब तक 1550 भवन मालिकों ने अनुमति ली, लेकिन केवल 806 भवनों में ही सिस्टम बनाया गया। इनमें एक भी सरकारी भवन शामिल नहीं है।
निगम खाते में जमा 10.79 करोड़ रुपए
नगर निगम रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2019-20 से अब तक 1.55 करोड़ रुपए भवन मालिकों को लौटाए गए हैं, जबकि 10 करोड़ 79 लाख 43 हजार रुपए अब भी निगम खाते में जमा हैं। यह राशि भवन मालिकों को पूर्णता प्रमाण पत्र जमा करने के बाद ही लौटाई जाती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन भवन मालिकों ने नक्शा पास कराते समय रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का दावा किया लेकिन निर्माण नहीं कराया, उनकी जमा सुरक्षा राशि राजसात कर ली जाएगी। भवन नक्शा पास कराने के समय 110 रुपए प्रति वर्गमीटर के हिसाब से राशि जमा कराई गई थी।
नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने बताया कि 1600 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल वाले मकान मालिकों को रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं। हर हाल में 15 जून तक निर्माण कार्य पूरा करना होगा, तभी जमा राशि वापस की जाएगी।
हालांकि शहर में यह चर्चा भी है कि हर साल गर्मी बढ़ने पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर अभियान शुरू होता है, लेकिन बारिश के बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है।
