महाराणा प्रताप चौक के शिलालेख पर विवाद, ‘राष्ट्रकवि’ उपाधि को बताया भ्रामक, सामाजिक कार्यकर्ता ने कलेक्टर और निगम कमिश्नर से की शिकायत

बिलासपुर। शहर के महाराणा प्रताप चौक पर लगे शिलालेख को लेकर नया विवाद सामने आया है। शिलालेख पर एक स्थानीय व्यक्ति के नाम के आगे लिखी गई ‘राष्ट्रकवि’ और ‘डॉक्टर’ उपाधि पर आपत्ति जताते हुए इसकी शिकायत जिला कलेक्टर और नगर पालिक निगम कमिश्नर से की गई है।

रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश चौबे ने प्रशासन को सौंपे पत्र में कहा है कि नवंबर 2014 में प्रतिमा लोकार्पण के अवसर पर लगाए गए शिलालेख में डॉ. ब्रजेश सिंह के नाम के आगे ‘राष्ट्रकवि’ लिखा गया है, जो भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण है।

चौबे ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि भारतीय साहित्य के इतिहास में केवल मैथिलीशरण गुप्त और डॉ. रामधारी सिंह दिनकर को ही आधिकारिक रूप से ‘राष्ट्रकवि’ माना गया है। उन्होंने कहा कि छायावाद के प्रमुख स्तंभ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ को भी यह सम्मान नहीं मिला, ऐसे में किसी अन्य व्यक्ति के नाम के आगे इस उपाधि का उपयोग करना उचित नहीं है।

शिकायतकर्ता ने आरटीआई और अन्य माध्यमों का हवाला देते हुए शिलालेख में लिखी गई ‘डॉक्टर’ उपाधि पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह के शिलालेख भविष्य में ऐतिहासिक और शोध संबंधी दस्तावेज के रूप में उपयोग किए जाते हैं। यदि इनमें गलत जानकारी दर्ज रहेगी तो शोधार्थियों के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत होंगे।

राकेश चौबे ने प्रशासन से मामले की जांच कर आवश्यक संशोधन कराने की मांग की है। फिलहाल इस शिकायत के बाद मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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