
शशि मिश्रा

क्षेत्र के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम द्वारा मरीजों के परिजनों को किसी विशिष्ट या उनके मनपसंद ब्लड बैंक से ही ब्लड लाने के लिए बाध्य करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस अनुचित और असंवेदनशील प्रथा के खिलाफ आज NGO महा संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को एक ज्ञापन सौंपकर इस पर तुरंत अंकुश लगाने की मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में जब मरीज की जान बचाने के लिए एक-एक सेकंड कीमती होता है, तब अस्पताल प्रबंधन परिजनों पर मानसिक दबाव बनाता है। यदि परिजन किसी सरकारी अस्पताल, रेडक्रॉस या अन्य मान्यता प्राप्त अधिकृत ब्लड बैंक से ब्लड की व्यवस्था कर भी लेते हैं, तो निजी अस्पताल उसे स्वीकार करने में आनाकानी करते हैं और परिजनों को प्रताड़ित किया जाता है।
अस्पतालों और ब्लड बैंकों में व्यावसायिक साठगांठ का आरोप
विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि इस प्रकार की बाध्यता के पीछे सीधे तौर पर कुछ निजी अस्पतालों और चुनिंदा ब्लड बैंकों के बीच चल रही व्यावसायिक साठगांठ और कमीशनखोरी है। यह न सिर्फ चिकित्सा नैतिकता (Medical Ethics) का उल्लंघन है, बल्कि राष्ट्रीय रक्त संचरण परिषद (NBTC) के नियमों के भी पूरी तरह खिलाफ है। इस खेल में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

CMHO से की गई ये मुख्य मांगें:
जिले के सभी अस्पतालों के लिए सख्त गाइडलाइन जारी हो कि वे किसी भी मान्यता प्राप्त ब्लड बैंक के ब्लड को लेने से मना न करें।
अस्पतालों और निजी ब्लड बैंकों के इस गठजोड़ की जांच के लिए औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया जाए।
नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों का लाइसेंस रद्द करने जैसी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
इस अवसर पर अरुणिमा मिश्रा, अभिषेक शर्मा, बिंदु सिंह कच्छवाहा, गुलाब सिंह, शशि मिश्रा, गोविंद राय , श्याम,अभिषेक ठाकुर रहे
