एडवांस रकम लौटाने की बात छिपाकर दर्ज कराई एफआईआर, सिंप्लेक्स संचालकों को हाई कोर्ट से राहत

बिलासपुर। ने दुर्ग के कारोबारी दंपती के खिलाफ चल रही आपराधिक मामले की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। मामला जमीन सौदे के विवाद और 10 लाख रुपए की एडवांस राशि लौटाने के बाद भी तथ्य छिपाकर एफआईआर दर्ज कराने से जुड़ा है। मामले की अगली सुनवाई 15 जून से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

जानकारी के अनुसार भिलाई की सूर्या विहार कॉलोनी निवासी और सिंप्लेक्स कॉस्टिंग कंपनी की संचालक तथा उनके पति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई को चुनौती दी थी। दंपती को इस मामले में पहले ही हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।

याचिका में बताया गया कि 13 मार्च 2003 को संगीता शाह ने हुडको भिलाई निवासी के साथ जमीन बिक्री का एग्रीमेंट किया था। जमीन का सौदा 15 लाख रुपए में तय हुआ था, जिसके एवज में सुनील कुमार ने 10 लाख रुपए एडवांस चेक के माध्यम से दिए थे।

बाद में जमीन की रजिस्ट्री संभव नहीं होने पर संगीता शाह ने 10 अक्टूबर 2024 को ही सुनील कुमार के बैंक खाते में पूरी 10 लाख रुपए की राशि वापस ट्रांसफर कर दी थी। इसके बावजूद शिकायतकर्ता ने नवंबर 2025 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और दिसंबर 2025 में सिविल कोर्ट में वाद दायर किया। इसके बाद मार्च 2026 में दुर्ग कोर्ट में धारा 156(3) के तहत आवेदन देकर कारोबारी दंपती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई।

हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद बैंक स्टेटमेंट का अवलोकन करने के बाद माना कि 10 लाख रुपए शिकायतकर्ता के खाते में वापस ट्रांसफर किए जा चुके थे और इस तथ्य को शिकायत तथा सिविल सूट में जानबूझकर छिपाया गया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि मजिस्ट्रेट कोर्ट को यह जानकारी होती तो संभवतः एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया जाता।

इसी आधार पर हाई कोर्ट ने दुर्ग के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत में लंबित आपराधिक प्रकरण की आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है।

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