

ऑनलाइन फार्मेसी और अवैध दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को बिलासपुर जिले की करीब 1200 निजी मेडिकल दुकानें बंद रहीं। हड़ताल के चलते संभाग में लगभग 3 करोड़ रुपए का दवा कारोबार प्रभावित हुआ। शहर के तेलीपारा, सदर बाजार, व्यापार विहार, मुंगेली नाका और सरकंडा सहित प्रमुख मेडिकल बाजारों में पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा।
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर थोक और रिटेल दवा विक्रेताओं ने एक दिवसीय हड़ताल की। निजी मेडिकल स्टोर बंद होने से मरीजों की भीड़ रेडक्रॉस, श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर और जन औषधि केंद्रों में उमड़ पड़ी। यहां लोगों को घंटों लाइन लगाकर दवाएं खरीदनी पड़ीं।
कई मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई ब्रांडेड दवाएं नहीं मिलीं, जिसके चलते उन्हें वैकल्पिक या जेनेरिक दवाओं से काम चलाना पड़ा। मुंगेली नाका स्थित धन्वंतरी स्टोर में सुरेश कश्यप को शुगर की दवा ‘ग्लिमिकट एम-1’ नहीं मिलने पर ‘ग्लिमी हेल्प’ खरीदनी पड़ी। वहीं महेश शर्मा को बीपी की दवा ‘टेल्मा-40’ के बजाय ‘टेल्मीसार्टन’ लेना पड़ा।
हड़ताल के दौरान अस्पतालों में भर्ती मरीजों और इमरजेंसी मामलों में परेशानी अधिक बढ़ गई। शिशु भवन अस्पताल में भर्ती एक बच्चे के लिए जरूरी दवा नहीं मिलने पर परिजन सरकारी दुकानों के चक्कर लगाते रहे। बाद में औषधि विक्रेता संघ की हेल्पलाइन के जरिए दवा उपलब्ध कराई गई।
दोपहर में जिला औषधि विक्रेता संघ ने कलेक्टोरेट पहुंचकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर संजय अग्रवाल की अनुपस्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन देकर ऑनलाइन फार्मेसी पर रोक लगाने और अवैध दवा बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने वालों में संघ अध्यक्ष राकेश शर्मा, सचिव सच्चिदानंद तिर्थानी, हरेंद्र सिंह, विशाल गोयल, पवन छाबड़ा और संजय महोबे सहित बड़ी संख्या में दवा कारोबारी शामिल रहे।
दवा विक्रेताओं ने चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त कानूनी कार्रवाई, बिना वैध ई-प्रिस्क्रिप्शन होम डिलीवरी पर रोक, कोविड काल में जारी ऑनलाइन बिक्री संबंधी अधिसूचनाएं वापस लेना और ऑनलाइन फार्मेसी द्वारा भारी छूट व प्रतिस्पर्धा-विरोधी कीमतों पर रोक लगाने की मांग शामिल है।
हालांकि शहर में अपोलो फार्मेसी की 15 दुकानों में से सरकंडा, सिटी सेंटर और चकरभाठा समेत चार दुकानें खुली रहीं। इसके अलावा रेडक्रॉस, श्री धन्वंतरी मेडिकल स्टोर और जन औषधि केंद्रों के जरिए मरीजों को कुछ राहत मिली।
