बिलासपुर में डॉक्टरों की सतर्कता से बची दो वर्षीय मासूम की जान, लक्षणों के आधार पर किया सर्पदंश का सफल इलाज, अभिभावकों के लिए डॉक्टर श्रीकांत गिरी की महत्वपूर्ण एडवाइजरी

प्रवीर भट्टाचार्य

सक्ती/बिलासपुर, 27 अप्रैल 2026।

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के ग्राम जामपाली से एक संवेदनशील और शिक्षाप्रद मामला सामने आया है, जहां चिकित्सकों की सूझबूझ और अनुभव के चलते दो वर्षीय मासूम को नया जीवन मिला। परिजन जहां बच्ची की गंभीर स्थिति की वजह समझ नहीं पा रहे थे, वहीं डॉक्टरों ने केवल लक्षणों के आधार पर सर्पदंश की आशंका जताते हुए समय रहते उपचार शुरू किया और उसकी जान बचा ली।

अचानक बिगड़ी तबीयत, परिजन रहे अनजान

ग्राम जामपाली (पोस्ट नदौरखुर्द) निवासी सोनम बंजारे और प्यारेलाल बंजारे की दो वर्षीय बेटी वृतिका बंजारे रोज की तरह खेलकूद के बाद रात में जमीन पर ही सो गई। अगले दिन सुबह जब परिजनों की नींद खुली तो बच्ची असामान्य स्थिति में मिली। वह न तो ठीक से उठ पा रही थी, न आंखें खोल पा रही थी और शरीर में अत्यधिक कमजोरी दिखाई दे रही थी। उसने पेट दर्द की शिकायत भी की।
स्थिति को समझ नहीं पाने पर परिजन उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां सांस लेने में दिक्कत पाई गई। प्राथमिक उपचार के तौर पर बच्ची की श्वास नली में पाइप डालकर कृत्रिम सांस दी गई और उसे तत्काल बिलासपुर रेफर किया गया।

गंभीर अवस्था में पहुंची शिशु भवन

आखिरी उम्मीद के साथ परिजन बच्ची को शिशु भवन अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीकांत गिरी और उनकी अनुभवी टीम ने जांच में पाया कि बच्ची की हालत अत्यंत गंभीर है। उसकी सांस लगभग बंद हो चुकी थी, शरीर ठंडा पड़ने लगा था, आंखें बंद थीं और मुंह से झाग निकल रहा था।
तत्काल बच्ची को वेंटिलेटर पर रखा गया और श्वास नली में कृत्रिम पाइप के जरिए सांस दी जाने लगी। इसी दौरान परिजनों से पूछताछ की गई, लेकिन वे किसी भी स्पष्ट कारण की जानकारी नहीं दे सके।

लक्षणों से पहचाना सर्पदंश, शुरू किया एंटी वेनम

डॉक्टरों ने अनुभव के आधार पर लक्षणों का विश्लेषण किया और सर्पदंश की आशंका जताई। बिना समय गंवाए बच्ची को एंटी वेनम दिया गया और इलाज शुरू किया गया। लगातार निगरानी और उपचार के बाद धीरे-धीरे बच्ची की सांस सामान्य होने लगी और उसकी हालत में सुधार आया।

‘मृतप्राय’ स्थिति से मिली जिंदगी

डॉ. श्रीकांत गिरी के अनुसार, जब बच्ची अस्पताल लाई गई थी, तब उसकी सांस और दिल की धड़कन लगभग थम चुकी थी। तत्काल सीपीआर देकर उसे स्थिर किया गया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। टीम के लगातार प्रयासों से बच्ची को जीवनदान मिल सका।

सर्पदंश के ‘साइलेंट’ लक्षणों पर चेतावनी

डॉ. गिरी ने बताया कि छोटे बच्चों में सर्पदंश के मामले अक्सर बिना स्पष्ट निशान के भी सामने आते हैं। कई बार सांप, विशेषकर करैत, कपड़ों के ऊपर से काटते हैं, जिससे शरीर पर दांत के निशान नहीं मिलते, लेकिन लक्षण पूरी तरह सर्पदंश जैसे ही होते हैं—जैसे अचानक कमजोरी, आंखें न खुलना, हाथ-पैर न हिल पाना, पेट दर्द और सांस लेने में कठिनाई। उन्होंने कहा कि कोबरा जैसे कुछ सांपों के काटने पर स्पष्ट लक्षण जैसे दांत के निशान, सूजन आदि नजर आते हैं। ऐसे में इलाज आसान होता है।
उन्होंने कहा कि अक्सर माता-पिता इन लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है।

जमीन पर सुलाने से बढ़ता खतरा

डॉ श्रीकांत गिरी ने आगाह किया कि बच्चों को जमीन पर सुलाना जोखिम भरा हो सकता है। सांप अपने शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते और ठंड या गर्मी से बचने के लिए घरों में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में वे बच्चों के पास आकर बैठ सकते हैं और हलचल होने पर काट भी सकते हैं।
बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है, हालांकि गर्मी और ठंड के मौसम में भी जोखिम बना रहता है—खासतौर पर उन घरों में जहां कूलर या एसी चलते हैं।

अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह

डॉ. गिरी ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को हमेशा सुरक्षित स्थान, विशेषकर बिस्तर पर मच्छरदानी के अंदर सुलाएं। यदि बच्चा अचानक सुस्त पड़ जाए, आंखें न खोले, शरीर में कमजोरी हो या सांस लेने में दिक्कत हो, तो बिना देरी किए उसे तुरंत बड़े अस्पताल ले जाएं।
उन्होंने कहा कि समय पर उपचार ही ऐसे मामलों में जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होता है।
यह घटना न केवल चिकित्सकों की दक्षता का उदाहरण है, बल्कि अभिभावकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि वे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर हर समय सतर्क रहें।

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