

सुभाष चौक, सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में वैशाख शुक्ल अष्टमी के पावन अवसर पर ब्रह्मशक्ति माँ बगलामुखी की जयंती का महापर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस महोत्सव की तैयारियों को लेकर पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने माँ बगलामुखी के स्वरूप, उनकी उत्पत्ति और कलयुग में उनकी साधना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला है।
माँ बगलामुखी: स्वरूप और पौराणिक उत्पत्ति
माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं, जिन्हें ‘पीताम्बरा’ और ‘ब्रह्मास्त्र विद्या’ भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सतयुग में जब एक भीषण तूफान ने ब्रह्मांड को नष्ट करने का संकट पैदा किया, तब भगवान विष्णु ने ‘हरिद्रा सरोवर’ के तट पर कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी जल से प्रकट हुईं और अपनी ‘स्तंभन शक्ति’ से उस तूफान को शांत कर सृष्टि की रक्षा की। माँ को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, जो शांति और शक्ति का प्रतीक है।
कलयुग में उपासना का महत्व और लाभ

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज के अनुसार, वर्तमान युग में जहाँ मानसिक तनाव, प्रतिस्पर्धा और कानूनी जटिलताएँ अधिक हैं, वहाँ माँ की साधना एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह कार्य करती है। उनकी उपासना के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं –
शत्रु बाधा और विजय: वाद-विवाद, शास्त्रार्थ और कानूनी मुकदमों (न्यायालयीन मामलों) में सत्य के पक्ष में विजय प्राप्त करने के लिए माँ की कृपा अनिवार्य है। यह शत्रुओं की बुद्धि और वाणी का स्तंभन कर उन्हें परास्त करती है।
सुरक्षा और न्याय:* यदि कोई अकारण अत्याचार कर रहा हो, तो उसे रोकने और सबक सिखाने के लिए माँ की शक्ति का आह्वान किया जाता है।
*वाक् सिद्धि: राजनीति, न्यायपालिका या सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए माँ की साधना वाक्-चातुर्य और प्रभावशीलता प्रदान करती है।
सर्व मनोरथ सिद्धि: संतान प्राप्ति, योग्य वर-वधू की प्राप्ति, यश-कीर्ति और ग्रहों (विशेषकर मंगल और शनि) के अशुभ प्रभाव की शांति के लिए यह साधना अचूक है।
विद्यार्थियों हेतु: प्रतियोगी परीक्षाओं में एकाग्रता बढ़ाने और सफलता के लिए माँ का आशीर्वाद लेते हैं।
माँ बगलामुखी की साधना अत्यंत उग्र और शक्तिशाली होती है, अतः इसे सदैव योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।
उत्सव का कार्यक्रम और विशेष पूजन
जयंती के पावन पर्व पर श्री पीतांबरा पीठ में प्रतिदिन माँ बगलामुखी का भव्य श्रृंगार एवं विशेष पूजन किया जाएगा।
इसी कड़ी में प्रातःकाल श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का विधिवत रुद्राभिषेक, श्री महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती देवी का ‘श्रीसूक्त’ के षोडश मंत्रों द्वारा दुग्धधारा पूर्वक अभिषेक, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और रिद्धि-सिद्धि के दाता श्री सिद्धिविनायक जी का विशेष पूजन एवं मनोहारी श्रृंगार किया जाएगा।
नौ दिवसीय पीताम्बरा हवनात्मक महायज्ञ का आयोजन किया गया है। वैशाख कृष्ण चतुर्दशी से प्रारंभ होकर यह ‘श्री पीताम्बरा हवनात्मक यज्ञ’ प्रतिदिन रात्रि 8:00 बजे से 12:30 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति बगलामुखी जयंती के पावन पर्व पर रात्रिकाल में संपन्न की जाएगी।
पीठाधीश्वर जी ने समस्त भक्तजनों से इस महापर्व में सम्मिलित होकर माँ पीतांबरा का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया है।
