

बिलासपुर। शहर में वर्षों से चले आ रहे अवैध नल कनेक्शनों के खिलाफ नगर निगम ने सख्ती शुरू कर दी है। जोन-2 तिफरा में अभियान चलाकर 84 अवैध कनेक्शनों को काटा गया और प्रत्येक उपभोक्ता से 5-5 हजार रुपए शुल्क लेकर उन्हें वैध किया गया। इस कार्रवाई से निगम को राजस्व भी प्राप्त हुआ है, वहीं जल वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, शहर के 70 वार्डों में 44,281 सामान्य और 5,502 भागीरथी योजना के वैध कनेक्शन हैं, जबकि करीब 20 हजार अवैध कनेक्शन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव बना रहे हैं। इसके कारण पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है और कई क्षेत्रों में कम या गंदे पानी की शिकायतें सामने आती रही हैं। निगम को वर्ष 2019 से अब तक करीब 3 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान भी उठाना पड़ा है।
जोन-2 के जोन कमिश्नर भूपेंद्र उपाध्याय ने बताया कि तिफरा क्षेत्र में सर्वे के बाद अवैध कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें नियमित किया गया है। इससे लीकेज की समस्या में कमी आएगी और राजस्व में वृद्धि होगी।
जल बर्बादी रोकने ऑटोमैटिक सिस्टम की तैयारी
इधर, शहर में जल आपूर्ति के दौरान हो रही भारी बर्बादी को रोकने के लिए नगर निगम ने अमृत मिशन के तहत नई योजना तैयार की है। इसके तहत 22 उच्च जल टंकियों में ऑटोमैटिक कंट्रोल वाल्व लगाए जाएंगे, जिससे टंकी भरते ही पानी की सप्लाई स्वतः बंद हो जाएगी और ओवरफ्लो पर रोक लगेगी।
इस योजना के लिए 8 करोड़ 90 लाख 6 हजार रुपए का प्रस्ताव तैयार कर 15वें वित्त आयोग के तहत शासन को भेजा जाएगा। साथ ही प्रत्येक टंकी में फ्लो मीटर भी लगाए जाएंगे, जिससे पानी की सप्लाई की सटीक निगरानी हो सकेगी।
पुराना सिस्टम बना चुनौती
वर्तमान में शहर में 52 जल टंकियों और 982 पावर पंपों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 7.2 करोड़ लीटर पानी की सप्लाई की जा रही है। हालांकि पाइपलाइन लीकेज और मैन्युअल सिस्टम के कारण 5 से 10 प्रतिशत पानी रास्ते में ही बर्बाद हो रहा है। कई स्थानों पर लीकेज सुधारने में 10 से 15 दिन तक का समय लग रहा है।
आंशिक सुधार से उठ रहे सवाल
हालांकि निगम फिलहाल केवल 22 टंकियों में ऑटोमैटिक सिस्टम लागू करने जा रहा है, जबकि शेष नेटवर्क पुराने ढर्रे पर ही संचालित होगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या आंशिक सुधार से पूरी समस्या का समाधान हो पाएगा।
जाल शाखा के प्रभारी अनुपम तिवारी के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने के बाद जल स्तर के अनुसार पानी का संचालन स्वतः होगा, जिससे ओवरफ्लो और बर्बादी पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
