

बिलासपुर। शहर में शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। स्थायी भवन निर्माण में समय लगने के मद्देनज़र कॉलेज को फिलहाल अस्थायी भवन में संचालित करने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए कोनी क्षेत्र में स्थायी परिसर हेतु भूमि का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसकी स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।
नगर निगम ने अस्थायी संचालन के लिए व्यापार विहार स्थित पुराने आरटीओ कार्यालय के भवन को चिन्हित किया है। प्रस्ताव के अनुसार, इस भवन के प्रथम तल पर उपलब्ध रिक्त स्थान को किराए पर लेकर कॉलेज संचालित किया जाएगा। यह भवन वर्तमान में खाली है और कलेक्टर द्वारा निर्धारित दर पर नगर निगम की शर्तों के तहत तीन वर्षों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत आगामी छह महीनों में आवश्यक तैयारियां पूरी कर कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि छात्रों को नए सत्र के लिए प्रतीक्षा न करनी पड़े। प्रस्ताव को चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से तैयार कर मेयर इन काउंसिल (MIC) में प्रस्तुत किया गया, जहां इसे मंजूरी मिल चुकी है।
कॉलेज के शुरू होने से बिलासपुर सहित आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को बीपीटी (बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी) और एमपीटी (मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी) जैसे पाठ्यक्रमों के लिए अन्य शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
प्रदेश में सीमित हैं फिजियोथेरेपी संस्थान
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में फिजियोथेरेपी शिक्षा का दायरा सीमित है। रायपुर और दुर्ग में प्रमुख रूप से यह कोर्स संचालित हो रहा है, जबकि निजी संस्थानों में भी सीटें सीमित हैं। ऐसे में बिलासपुर में नए कॉलेज की स्थापना से क्षेत्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे।
निगम को भी होगा आर्थिक लाभ
नगर निगम के संपदा अधिकारी प्रवेश कश्यप के अनुसार, पुराने आरटीओ भवन को कॉलेज के लिए किराए पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। इससे जहां विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा, वहीं निगम की राजस्व आय में भी वृद्धि होगी।
प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार होगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
