कानन पेंडारी जू में मांसाहारी वन्यप्राणियों के सामने आहार संकट, बर्ड फ्लू के चलते मुर्गियों पर प्रतिबंध

शशि मिश्रा


बिलासपुर। कोनी क्षेत्र में मुर्गियों की मौत और बर्ड फ्लू की आशंका के बाद Kanan Pendari Zoo में मांसाहारी वन्यप्राणियों के सामने आहार का संकट गहराने लगा है। एहतियात के तौर पर जू प्रबंधन ने बाहर से आने वाली मुर्गियों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।
जू प्रबंधन के अनुसार, वर्तमान में मांसाहारी वन्यप्राणियों को बकरे और मछली का मांस जांच के बाद दिया जा रहा है। हर आहार को डॉक्टर और कर्मचारियों की निगरानी में परखा जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार का संक्रमण वन्यप्राणियों तक न पहुंचे।
करीब 114 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले इस मीडियम जू का संचालन Achanakmar-Amarkantak Biosphere Tiger Reserve द्वारा किया जा रहा है। यहां 65 प्रजातियों के 650 से अधिक वन्यप्राणी हैं, जिनमें शेर, बाघ, तेंदुआ, हाइना और भालू जैसे मांसाहारी जीव शामिल हैं।
मुर्गियों पर रोक, बकरे के मांस से चल रहा काम बर्ड फ्लू की आशंका के चलते जू में मुर्गा-मुर्गियों के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब मांसाहारी जीवों को रोजाना करीब 180 किलो मटन (बकरे का मांस) और मछली दी जा रही है। जिंदा बकरों को जू में लाकर जांच के बाद ही काटा जाता है, फिर उसे उबालकर वन्यप्राणियों को खिलाया जाता है।
आहार पर हर महीने लाखों का खर्च जू प्रबंधन के मुताबिक, मांसाहारी वन्यप्राणियों के आहार पर हर महीने 19 लाख रुपए से अधिक खर्च होता है, जबकि शाकाहारी वन्यप्राणियों के भोजन पर 8 से 9 लाख रुपए खर्च किए जाते हैं।
सुरक्षा के लिए सख्त उपाय बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए जू को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया था, जिसे 5 अप्रैल से फिर से खोल दिया गया है। फिलहाल जू परिसर और वन्यप्राणियों के केज में लगातार सैनिटाइजेशन किया जा रहा है, ताकि संक्रमण का कोई खतरा न रहे।
प्रबंधन का कहना है कि जब तक शासन की ओर से नया निर्देश जारी नहीं होता, तब तक मुर्गियों पर प्रतिबंध जारी रहेगा और वैकल्पिक आहार से ही वन्यप्राणियों की देखभाल की जाएगी।

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