

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक समान अपराध का आरोप हो और उनके खिलाफ समान साक्ष्य मौजूद हों, तो किसी एक आरोपी के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि समान साक्ष्यों के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराना और किसी एक को बरी करना न्यायसंगत नहीं है, जब तक उसके लिए ठोस और अलग कारण सिद्ध न हो।
सतीश जग्गी का आरोप: सरकारी साजिश
मामले में मृतक के बेटे सतीश जग्गी की ओर से दाखिल अपील में उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया कि हत्या तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई जांच के दौरान कई अहम सबूत प्रभावित किए गए, इसलिए मामले में साजिश के पहलू को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
पहले भी सजा बरकरार, फिर सुप्रीम कोर्ट से वापसी
डिवीजन बेंच पहले ही इस हत्याकांड के अन्य दोषियों की अपील खारिज कर उनकी आजीवन कारावास की सजा बरकरार रख चुकी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए मामले को पुनः हाईकोर्ट भेजा, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके।
2003 में हुई थी हत्या
गौरतलब है कि 4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से दो सरकारी गवाह बन गए थे। निचली अदालत ने 2007 में संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को सजा हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई
इधर, अमित जोगी ने फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पढ़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और बिना पूरी सुनवाई के दोषी ठहराया गया। इस याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है।
मामले में आए इस फैसले को छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
