गैस संकट और बर्ड फ्लू का असर: रेस्टोरेंट का बदला मेन्यू, दाम बढ़ाने की तैयारी


बिलासपुर। शहर में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और बर्ड फ्लू के चलते चिकन-अंडे पर लगे प्रतिबंध का सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई बिरयानी सेंटर और नॉनवेज दुकानें बंद हो चुकी हैं, जबकि जो संचालित हैं, उन्होंने अपने मेन्यू में बड़े बदलाव कर दिए हैं। बढ़ती लागत और घटती सप्लाई के बीच संचालक अब 10 से 15 प्रतिशत तक दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
जानकारी के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध के कारण गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। कंपनियों द्वारा 70 प्रतिशत सप्लाई का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत में होटल संचालकों को मुश्किल से 20 प्रतिशत गैस ही मिल पा रही है। इसका असर सीधे किचन संचालन पर पड़ा है। पहले जहां गैस की पर्याप्त उपलब्धता रहती थी, अब 4-5 दिन में एक सिलेंडर मिलना भी मुश्किल हो गया है।


मेन्यू में बड़ा बदलाव, तंदूर की जगह तवा
गैस की कमी के चलते रेस्टोरेंट संचालकों ने ज्यादा ईंधन खपत वाले व्यंजन मेन्यू से हटाने शुरू कर दिए हैं। तंदूरी आइटम, नान, रूमाली रोटी, दम बिरयानी, ग्रेवी और डीप फ्राइड डिश अब कम हो गई हैं। इनके स्थान पर रोटी-पराठा, पुलाव, फ्राइड राइस, ड्राई डिश और स्टर-फ्राई को बढ़ावा दिया जा रहा है। तंदूर की जगह अब तवा का उपयोग बढ़ गया है, वहीं चाय-कॉफी भी इंडक्शन पर बनाई जा रही है।
वैकल्पिक साधनों पर शिफ्ट हो रहे संचालक
गैस संकट से निपटने के लिए होटल संचालक डीजल-गुटका भट्ठी, लकड़ी के आधुनिक चूल्हों और इलेक्ट्रिक इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं। एक संचालक ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से करीब 25 हजार रुपए में इंडक्शन मंगवाया है, लेकिन इससे बिजली खर्च बढ़ने की चिंता भी है।


छोटे होटल-ठेले बंद होने की कगार पर
कमर्शियल गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यवसायियों पर पड़ा है। कई छोटे रेस्टोरेंट और ठेले बंद हो चुके हैं, जबकि कुछ ने खर्च कम करने के लिए दिन में सिर्फ एक समय ही दुकान खोलना शुरू कर दिया है। संचालकों का कहना है कि सीमित गैस में पूरे दिन संचालन संभव नहीं है।
बर्ड फ्लू से नॉनवेज कारोबार प्रभावित
शहर में बर्ड फ्लू के चलते चिकन और अंडे की बिक्री पर प्रतिबंध लगा हुआ है। अधिकांश रेस्टोरेंट का मेन्यू इन्हीं पर आधारित था, जिससे उनकी आय का बड़ा हिस्सा आता था। चिकन और अंडा गायब होने से रेस्टोरेंट की रौनक फीकी पड़ गई है। मटन की कीमत करीब 800 रुपए प्रति किलो होने के कारण यह आम ग्राहकों की पहुंच से बाहर है, जबकि मछली अपेक्षाकृत सस्ती होने के बावजूद हर किसी की पसंद नहीं है।
दाम बढ़ाने की मजबूरी, ग्राहकी घटने का डर
रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की कमी, बढ़ती ईंधन लागत और खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने से नुकसान हो रहा है। ऐसे में 10-15 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाना मजबूरी हो गई है, लेकिन इससे ग्राहकी कम होने का डर भी बना हुआ है।


सरकार की सलाह: पीएनजी कनेक्शन लें
नोडल अधिकारी हेमप्रकाश साहू के अनुसार, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करने की सलाह दी गई है। इससे उन्हें 20 प्रतिशत की बजाय करीब 40 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध हो सकती है। हालांकि, वर्तमान हालात में यह भी पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
कुल मिलाकर, गैस संकट और बर्ड फ्लू के दोहरे असर ने बिलासपुर के होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को गंभीर संकट में डाल दिया है। आने वाले दिनों में हालात नहीं सुधरे तो कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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