
शशि मिश्रा

महाराष्ट्र के नासिक में मात्र दसवीं पास ‘कैप्टन’ अशोक खरात ने पिछले दो दशकों के दौरान जो साम्राज्य खड़ा किया, वह तंत्र मंत्र और ज्योतिष की आड़ में बुना गया भारत का संभवतः सबसे वीभत्स और बड़ा ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट साबित हो रहा है।

लगभग बीस साल पहले मर्चेंट नेवी का फर्जी ‘कैप्टन’ बनकर लांच हुए इस व्यक्ति ने स्वयं को कॉस्मोलॉजी और अंकशास्त्र का ऐसा विशेषज्ञ घोषित किया, जिसकी पहुंच सीधे ब्रह्मांडीय शक्तियों तक थी। देखते ही देखते सिन्नर के एक साधारण गांव का यह व्यक्ति 1500 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति का मालिक बन बैठा, जिसमें मुंबई, पुणे और नासिक के पॉश इलाकों में फैली जमीनें, आलीशान गाड़ियां और राजनीतिक रसूख शामिल था। लेकिन इस वैभव की नींव किसी ईश्वरीय वरदान पर नहीं, बल्कि उन सौ से अधिक महिलाओं की बेबसी और ब्लैकमेलिंग पर टिकी थी, जिन्हें खरात ने बड़ी चालाकी से अपने जाल में फंसाया था।

उसकी कार्यशैली किसी पेशेवर अपराधी से भी कहीं अधिक शातिराना थी। वह पहले उच्च पदस्थ आईएएस/आइपीएस महिला अधिकारियों, जानी मानी महिला राजनेताओं, रसूखदार परिवारों की महिलाओं और ग्लैमर जगत की अभिनेत्रियों को अपनी ‘दैवीय शक्तियों’ और बड़े नेताओं के साथ अपनी तस्वीरों के जरिए प्रभावित करता था। जब ये महिलाएं अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उसके आश्रम पहुंचतीं, तो उन्हें ‘अभिमंत्रित जल’ या विशेष ‘प्रसाद’ के नाम पर नशीला पदार्थ दिया जाता था। अर्ध-चेतन अवस्था में उनका यौन शोषण किया जाता और गुप्त कैमरों से उनकी आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली जाती थी।
इतना ही नहीं, अपनी अघोरी प्रवृत्तियों को सिद्ध करने के लिए वह एक गिलास में अपना यूरिन (पेशाब) करता और महिलाओं को शुद्धिकरण के नाम पर उसे पीने के लिए विवश करता था, ताकि वे मानसिक रूप से पूरी तरह उसके अधीन हो जाएं।
एक बार जब इन प्रभावशाली महिलाओं के वीडियो खरात के कब्जे में आ जाते, तो शुरू होता था ब्लैकमेलिंग और उगाही का वह अंतहीन सिलसिला, जिसने उसे फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया। बदनामी और करियर खत्म होने के डर से ये महिलाएं उसके सामने घुटने टेकने पर विवश होतीं थीं। इस ढोंगी ने उनसे केवल शारीरिक संबंध ही नहीं बनाए गए, बल्कि उनसे करोड़ों रुपये, बेशकीमती जमीनें और सरकारी ठेकों में हिस्सा वसूला गया।

जांच में सामने आ रहा है कि वह एक ‘बिचौलिये’ के रूप में भी काम करता था, जहाँ वह इन्हीं अधिकारियों और नेताओं के जरिए बड़े-बड़े सेटलमेंट करवाता था। उसके पास से मिली 58 वीडियो वाली पेनड्राइव और आईफोन ने महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इसमें कई ऐसे सफेदपोश चेहरे कैद हैं जो अब तक समाज में प्रतिष्ठित बने हुए थे।

इस मामले की जांच कर रही आईपीएस तेजस्विनी सतपुते के नेतृत्व में बनी एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि यह केवल एक ढोंगी बाबा का मामला नहीं है, बल्कि रसूख और वासना का एक ऐसा काला खेल है जिसमें ऊंचे पदों पर बैठी महिलाएं वर्षों तक उसकी बंधक बनी रहीं और चाहकर भी इस दलदल से बाहर नहीं निकल सकीं।

खरात के खिलाफ अब तक कुल 8 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें बलात्कार, धोखाधड़ी, जबरन वसूली और अघोरी प्रथाओं के गंभीर आरोप शामिल हैं। उसके पास से नकद, एक रिवॉल्वर, 21 जिंदा कारतूस और कई सीसीटीवी डीवीआर जब्त किए हैं। उसके मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच में 35 से अधिक ऐसे आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं जो उसकी ब्लैकमेलिंग की रणनीति का मुख्य हिस्सा थे।

अशोक खरात की संपत्ति का ब्योरा पुलिस और आयकर विभाग को भी हैरान कर देने वाला है। उसके पास लगभग 1500 करोड़ रुपये का साम्राज्य होने का अनुमान है, जिसमें 52 से अधिक संपत्तियों के दस्तावेज (सातबारा) मिले हैं। उसके पास नासिक के कनाडा कॉर्नर में एक आलीशान कार्यालय, मिरेगाँव में एक विशाल फार्महाउस, टिकडे कॉलोनी में बंगला और शिरडी से लेकर पनवेल तक फैली करोड़ों की बेनामी संपत्तियां और कृषि भूमि शामिल है। उसकी पत्नी के नाम पर ही ₹50 करोड़ से अधिक की जमीन होने का खुलासा हुआ है। खरात ने इन संपत्तियों का जाल केवल ज्योतिष के पेशे से नहीं, बल्कि रसूखदार लोगों को डराकर और उनके बीच ‘सेटलमेंट’ कराकर बुना था। वह ईशानेश्वर महादेव मंदिर जैसे धार्मिक संस्थानों का उपयोग भी अपने काले धन को सफेद करने और लोगों को प्रभावित करने के लिए करता था।

जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है, इसमें शामिल ‘बड़े चेहरों’ के बेनकाब होने का डर राजनीतिक गलियारों में साफ देखा जा सकता है। पुलिस ने खरात के उन सहयोगियों और करीबियों पर भी शिकंजा कसा है जो इन आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया या व्हाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित कर रहे थे; अब तक इस सिलसिले में राहुल शिंदे और योगेश आढाव जैसे लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में स्पष्ट किया है कि एसआईटी इस बात की भी जांच कर रही है कि कितने सरकारी अधिकारियों ने खरात को संरक्षण दिया था।
अशोक खरात की पहुंच केवल एक परिवार या पार्टी तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसने ‘कैप्टन’ और ‘सिद्ध पुरुष’ की अपनी छवि का इस्तेमाल कर 2005 से लेकर अब तक समय समय पर महाराष्ट्र की सत्ता में बैठे दलों कांग्रेस, एनसीपी व शिवसेना आदि के कद्दावर नेताओं में अपनी प्रगाढ़ पैंठ बना रखी थी और भाजपा के भी कुछ नेताओं के साथ अपने संबंध बना लिए थे। यह एक कड़वा सच है कि जब तक सत्ता में बैठे कद्दावर नेताओं का संरक्षण प्राप्त होता रहा, तब तक प्रशासन ऐसे ‘सफेदपोश’ अपराधियों पर हाथ डालने से कतराता रहा!
2025 के उत्तरार्द्ध में अजीत पवार की मृत्यु के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति का संतुलन काफी बदल गया। उनके जाने के बाद एनसीपी का वह हिस्सा जो खरात जैसे लोगों के लिए ‘कवच’ का काम कर रहा था, कमजोर पड़ा।
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा है कि पहले की सरकारों के दौरान खरात के विरुद्ध आने वाली शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता था। लेकिन वर्तमान में देवेंद्र फडणवीस (गृह मंत्री) द्वारा विधानसभा में इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाना और SIT (एसआईटी) का गठन करना यह दर्शाता है कि अब राजनीतिक संरक्षण की वह दीवार ढह चुकी है। प्रशासन की अब तक की ‘हिम्मत’ न कर पाने के पीछे एक बड़ा कारण वह ब्लैकमेलिंग भी थी। क्योंकि खरात के पास मौजूद वीडियोज में केवल महिलाएं ही नहीं, बल्कि कई पुरुष राजनेता और रसूखदार अधिकारी भी ऐसी स्थितियों में कैद थे जिससे उनका करियर तबाह हो सकता था।
जानकारों का मानना है कि जब तक वह प्रभावशाली था, तब तक वह इन वीडियो के जरिए शासन-प्रशासन की ‘जुबान’ बंद रखने में कामयाब रहा था। अजीत पवार के निधन और सत्ता के नए ध्रुवीकरण ने जांच एजेंसियों को वह स्वतंत्र माहौल दिया, जहाँ वे अब उन रसूखदारों की परवाह किए बिना कार्यवाही कर पा रही हैं।
