

चंद्रपुर (महाराष्ट्र)। एक ऐसी कहानी, जिसे पहले हादसा समझकर बंद कर दिया गया था, तीन साल बाद खुली तो उसने रिश्तों की बुनियाद तक हिला दी। जयंत बल्लवार की मौत को जहां 2023 में अचानक हुई प्राकृतिक घटना माना गया था, वहीं अब जांच में यह एक सुनियोजित हत्या निकली—और आरोपी कोई और नहीं, बल्कि उनकी अपनी बेटी है।
अचानक मौत, बिना शक बंद हो गया केस
25 मार्च 2023 को ड्यूटी के दौरान जयंत बल्लवार अचानक गिर पड़े थे। उन्हें तुरंत गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल चंद्रपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उस वक्त मामला सामान्य मौत मानकर बंद कर दिया गया—न कोई शक, न कोई सवाल।
तीन साल बाद आया चौंकाने वाला मोड़
समय बीत गया, फाइलें बंद हो गईं, लेकिन सच्चाई दबी नहीं रह सकी। चंद्रपुर पुलिस ने जब इस केस को दोबारा खोला, तो परत-दर-परत एक खौफनाक साजिश सामने आई। जांचकर्ताओं ने पाया कि यह मौत नहीं, बल्कि एक ठंडी साजिश के तहत की गई हत्या थी।
मिल्कशेक बना मौत का जरिया
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि घटना वाले दिन कॉन्स्टेबल की बेटी ने अपने पिता को ड्यूटी पर जाने से पहले मिल्कशेक दिया था। इसी मिल्कशेक में जहर मिलाया गया था। पिता ने जैसे ही उसे पिया, कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे गिर पड़े।
प्यार के लिए पिता की हत्या
जांच में सामने आया कि बेटी अपने प्रेम संबंध को लेकर पिता के विरोध से नाराज थी। उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। दोनों ने मिलकर प्लान बनाया और उसी के तहत जहर देकर इस वारदात को अंजाम दिया।
प्रेमी ने ही खोला राज
इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब आरोपी बेटी और उसके प्रेमी के बीच ब्रेकअप हो गया। गुस्से में प्रेमी ने ही पुलिस को पूरी साजिश की जानकारी दे दी। इसी मुखबरी के बाद पुलिस ने केस को फिर से खोला और सच्चाई सामने आई।
चार आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में आरोपी बेटी, उसके पूर्व प्रेमी सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं और पुलिस अब मामले की कड़ियों को जोड़कर चार्जशीट तैयार कर रही है।
नौकरी भी मिली, सच भी छिपा रहा
हैरानी की बात यह है कि पिता की मौत के बाद बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में नौकरी भी मिल गई थी और वह ट्रेनी के रूप में कार्यरत थी। लेकिन तीन साल बाद सामने आई सच्चाई ने सब कुछ बदल दिया।
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि भरोसे और रिश्तों के टूटने की दर्दनाक कहानी है। जहां एक पिता अपनी बेटी पर भरोसा करता रहा, वहीं उसी भरोसे में छुपा था उसकी मौत का राज। तीन साल बाद खुला यह सच याद दिलाता है कि अपराध चाहे कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो—सच्चाई एक दिन सामने आ ही जाती है।
