

बिलासपुर। अनूपपुर की रहने वाली 26 वर्षीय महिला, जो घरेलू हिंसा का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी, उसे सिम्स बिलासपुर के डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। महिला के चेहरे पर गंभीर चोटों के चलते उसकी पहचान तक बदल गई थी, लेकिन जटिल सर्जरी के बाद अब उसका चेहरा सामान्य स्वरूप में लौट आया है।
15-20 हड्डियां टूटी, हालत थी गंभीर
डेंटल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश के अनुसार, जब महिला को अस्पताल लाया गया तब उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी। माथे, नाक और ऊपरी-निचले जबड़े सहित चेहरे की लगभग 15 से 20 हड्डियां टूट चुकी थीं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में पैनफेशियल फ्रैक्चर कहा जाता है।
3D सीटी स्कैन से बनाई गई सटीक योजना
सर्जरी से पहले महिला का 3D सीटी स्कैन किया गया, जिससे टूटी हड्डियों की सटीक स्थिति का पता चला। इसी डिजिटल मैपिंग के आधार पर ऑपरेशन की विस्तृत योजना तैयार की गई।
बिना बाहरी निशान के ‘कोरोनल तकनीक’ से सर्जरी
डॉक्टरों ने चेहरे पर किसी तरह का बाहरी निशान न आए, इसके लिए बाई-कोरोनल तकनीक अपनाई। इस प्रक्रिया में सिर के ऊपर एक कान से दूसरे कान तक चीरा लगाया जाता है, जिससे चेहरे की त्वचा को हटाकर अंदर की हड्डियों तक आसानी से पहुंच बनाई जा सके।
6-7 घंटे चली हाई-रिस्क सर्जरी
करीब 6 से 7 घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में टूटी हुई हड्डियों को सही क्रम में व्यवस्थित किया गया और उन्हें छोटी टाइटेनियम प्लेट्स व स्क्रू की मदद से जोड़ा गया। डॉक्टरों की टीम के बेहतर समन्वय और समय पर इलाज से महिला का चेहरा फिर से सामान्य हो सका।
डॉक्टरों ने बताया चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन
सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि कई हड्डियों के टुकड़ों में टूटने के कारण यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। चेहरे की विकृति को ठीक करना और प्लेटिंग करना डॉक्टरों के लिए बड़ी जिम्मेदारी थी, जिसे टीम ने सफलता से पूरा किया।
हालत स्थिर, सामान्य जीवन की उम्मीद
फिलहाल महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है और वह तेजी से रिकवरी कर रही है। डॉक्टरों के अनुसार, आने वाले समय में वह सामान्य जीवन जी सकेगी।
सिम्स बिलासपुर के डॉक्टरों की यह उपलब्धि न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह साबित करती है कि जटिल से जटिल सर्जरी भी सही तकनीक और विशेषज्ञता से संभव है।
