हिंदू नेता ठाकुर राम सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में हिंदू संगठन के सैकड़ो कार्यकर्ता पहुंचे गिरफ्तारी देने सरकंडा थाने,  जानिए फिर क्या हुआ

शशि मिश्रा

बुधवार को ठाकुर राम सिंह अपने सैकड़ो समर्थकों के साथ गिरफ्तारी देने सरकंडा थाने पहुंचे थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थी लेकिन पुलिस ने मामले में जांच जारी होने का हवाला देखकर उन्हें वापस लौटा दिया ।

मौजूदा अमेरिका- इजरायल और ईरान युद्ध में विवादित ईरान सुप्रीमो अली हुसैनी खामनेई की मौत के बाद कथित रूप से हिंदू नेता राम सिंह और उसके साथियों द्वारा जश्न मनाये जाने के मामले में मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाकर राम सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया था। सरकंडा पुलिस ने राम सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 299, 3 और 5 के तहत जुर्म में दर्ज किया है। इधर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी ठाकुर राम सिंह की गिरफ्तारी न होने के बाद मुस्लिम संगठनों द्वारा एसएसपी को ज्ञापन देकर ठाकुर राम सिंह की गिरफ्तारी की मांग की गई थी।

इधर हिंदू संगठनो और ठाकुर राम सिंह का कहना है कि देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की धार केवल एक दिशा में बह रही है। देश में रहने वाले ईरानी, शिया और मुस्लिम समुदाय के कई संगठन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के राष्ट्रपति नेतन्याहू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक का पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन उनके खिलाफ कोई अपराध दर्ज नहीं हुआ, लेकिन विवादित नेता अली खामनेई की मौत पर अपनी बात रखने के बाद ठाकुर राम सिंह पर एफआईआर दर्ज कर लिया गया, जबकि सच्चाई यह है कि पूर्व का पेरिस कहे जाने वाले ईरान जैसा लिबरल देश पूरे क्षेत्र में नहीं था लेकिन 1979 में कथित इस्लामी क्रांति के नाम पर खुमैनी और उसके बाद खामनेई ने ईरान को कट्टर इस्लामिक देश बना दिया।
यही कारण है कि खामनेई की मौत के बाद उनके ही मुल्क ईरान में जश्न मनाया जा रहा है। वहां की महिलाएं खुशी से झूम रही है लेकिन भारत में इन सबसे अनभिज्ञ एक खास वर्ग छाती पीट रहा है।

ठाकुर राम सिंह ने सोशल मीडिया पर भी वीडियो जारी करते हुए कहा कि उन्होंने तो सिर्फ इतना कहा था कि पाकिस्तान , भारत और बांग्लादेश में मुस्लिम कट्टर पंथियों द्वारा किए जा रहे किसी भी हमले और आतंकी घटनाओं का विरोध न करने वाले आज सुदूर ईरान की घटना पर छाती पीट रहे हैं । उन्होंने कहा था कि जिन लोगों को ईरान से सहानुभूति है, वे ईरान जाकर उनके पक्ष से लड़ाई लड़ सकते हैं। इतनी सी बात पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया गया जबकि इसी देश में खुलेआम अमेरिका और इजरायल के झंडे जलाए जा रहे हैं ।उनके राष्ट्रपतियों का पुतला दहन किया जा रहा है। मार्च निकाला जा रहा है, जिनके खिलाफ अब तक इस तरह का एफआईआर नहीं हुआ।

इसे पक्षपात पूर्ण कार्यवाही बताते हुए इसके विरोध में सामूहिक गिरफ्तारी देने की तैयारी थी। बुधवार को सर्व हिंदू समाज, वंदे मातरम मित्र मंडल , बजरंग दल समेत कई हिंदू संगठन के 400 के करीब कार्यकर्ता सरकंडा थाने गिरफ्तारी देने पहुंचे थे, लेकिन सरकंडा सीएसपी निमितेश सिंह ने उन्हें बताया कि फिलहाल मामले में जांच जारी है। जांच पूर्ण होने के बाद ही उचित कार्यवाही की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में निष्पक्षता से जांच की जाएगी और तभी कोई कार्यवाही होगी।

इस आश्वासन के बाद हिंदू संगठन के नेता लौट गए, जिन्होंने कहा कि इजरायल भारत का मित्र देश है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं यह बात कह चुके हैं। इसके बाद दो देशों की लड़ाई को देश में विवाद का मुद्दा बनाकर धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की जो कोशिश की जा रही है उस पर लगाम लगाने की आवश्यकता है, क्योंकि जो भी भारत में रहता है यहां का अन्न खाता है , उसकी निष्ठा भारत के साथ होनी चाहिए ना की किसी दूसरे देश के साथ। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर इस तरह के तमाम वीडियो मौजूद है जिसमें लोग चीख चीख कर कह रहे हैं कि उनकी निष्ठा ईरान के साथ है। यहां तक कहा जा रहा है कि अगर भारत और ईरान के बीच युद्ध हो गया तो वे ईरान के पक्ष में होंगे। इन्हें आस्तीन का सांप बताते हुए इनका सर कुचलना की मांग भी हिंदू संगठनो ने की है।

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