बिलासपुर में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: होम एग्जाम के बाद अचानक बोर्ड परीक्षा, नाराज अभिभावकों ने कलेक्टर बंगले का किया घेराव


बिलासपुर। शहर में कक्षा 5वीं और 8वीं की परीक्षा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सालभर एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई और होम एग्जाम देने के बाद अचानक बोर्ड परीक्षा दिलाने के फैसले से अभिभावकों में भारी नाराजगी है। ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के सैकड़ों अभिभावकों ने सोमवार देर रात कलेक्टर बंगले का घेराव कर विरोध जताया।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने सीबीएसई पाठ्यक्रम के नाम पर बच्चों का एडमिशन लिया और फरवरी से मार्च के पहले सप्ताह तक होम एग्जाम भी करा लिया। इसके बाद अचानक राज्य सरकार के आदेश का हवाला देकर एक दिन पहले बोर्ड परीक्षा देने की सूचना दे दी गई। इससे बच्चों को तैयारी का समय नहीं मिल पाया।
व्यापार विहार, मिशन स्कूल रोड और बहतराई स्थित ब्रिलियंट पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों ने इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। देर रात तक कलेक्टर से मिलने के लिए अभिभावक इंतजार करते रहे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। बाद में एसडीएम की समझाइश पर वे लौट गए।


अव्यवस्था के बीच कराई गई परीक्षा
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद अभिभावकों ने बच्चों को परीक्षा दिलाने भेजा। व्यापार विहार और मिशन स्कूल के छात्रों के लिए अलग परीक्षा केंद्र बनाए गए, लेकिन वहां भी अव्यवस्था देखने को मिली। एक ही हॉल में छात्रों को पास-पास बैठाकर परीक्षा ली गई, जहां कई छात्र एक-दूसरे से पूछकर उत्तर हल करते नजर आए।
राज्य मंत्री ने मांगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
स्कूल प्रबंधन का पक्ष
स्कूल की प्रिंसिपल रेचल अलेक्जेंडर के अनुसार, कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत बोर्ड परीक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने में देरी हुई। हाई कोर्ट में याचिका लंबित होने के कारण पहले होम एग्जाम कराए गए, बाद में आदेश आने पर दोबारा परीक्षा दिलाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र को अनुत्तीर्ण नहीं किया जाएगा।
नारायणा टेक्नो स्कूल भी जांच के घेरे में
इधर, अमेरी चौक स्थित नारायणा टेक्नो स्कूल पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। स्कूल पर कक्षा 1 से 8वीं तक सीबीएसई पाठ्यक्रम के नाम पर अभिभावकों से भारी फीस वसूलने का आरोप है, जबकि इस स्तर पर सीबीएसई की मान्यता का प्रावधान नहीं है।
जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने बताया कि कक्षा 8वीं तक स्कूलों का संचालन राज्य शासन के नियमों के तहत होता है और सीबीएसई की संबद्धता कक्षा 9 से 12 तक के लिए दी जाती है। स्कूल द्वारा अब तक कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है।
मामले की जांच के लिए शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर 7 दिनों में रिपोर्ट मांगी है। पहले ही स्कूल की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की जा चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में शिक्षा व्यवस्था और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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