हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शासन ने 10 बिंदुओं पर जवाब पेश किया लेकिन काम नहीं हो रहा, बाजार से लेकर नेशनल हाइवे पर खुलेआम घूमता मवेशियों का झुंड जानलेवा बन रहा

शशि मिश्रा

देखा जाए तो बिलासपुर के भीतर से गुजरने वाली मुख्य सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों और व्यस्त बाजार मार्गों पर मवेशियों की भीड़ आम दृश्य बन चुकी है। वाहन चालकों को हर समय अचानक सड़क के बीच आकर खड़े होने वाले गाय और सांडों से टकराने का खतरा बना रहता है। कई सड़क हादसे पहले ही हो चुके हैं जिसमें चालक और पशु दोनों घायल हुए हैं।

शहर में आवारा मवेशियों की मौजूदगी अब एक गंभीर और लगातार बढ़ती हुई समस्या बन चुकी है। शहर की प्रमुख सड़कों, चौराहों, बाजार क्षेत्रों और यहां तक कि नेशनल हाईवे पर भी इन मवेशियों घूमता नजर आता है. इससे जहां यातायात व्यवस्था अव्यवस्थित हो रही है, वहीं सड़क हादसों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन द्वारा चालाए गए अस्थायी अभियान कुछ समय के लिए राहत तो देते हैं, लेकिन समस्या फिर उसी स्थिति में लौट आती है। हाईकोर्ट ने भी मामले में सरकार को फटकार लगाई है। इसके बाद भी व्यवस्था नहीं सुधर रही है। कोर्ट ने इन्हें हटाने, टैगिंग करने और गौठानों में शिफ्ट करने का आदेश दिया है लेकिन इस पर काम नहीं हो रहा है।

शासन ने उपायों की बिंदुवार दी जानकारी

इस समस्या पर मुख्य सचिव ने अपने शपथपत्र में कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी दी है। इसमें

ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में संयुक्त निगरानी दल गठित करना

2000 से अधिक मवेशियों पर रेडियम पट्टी लगाना

पशुपालन विभाग के साथ मिलकर नसबंदी और कान टैगिंग अभियान चलाना

सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों के लिए आश्रय स्थल स्थापित करना

उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और चिह्नांकन करना

राजमार्गों के किनारे के गांवों में जागरूकता अभियान चलाना

आवारा मवेशियों के दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए जोगीपुर में 205.10 एकड़ का गौ अभयारण्य प्रस्तावित करना

लापरवाह पशुपालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना

रात में खतरा ज्यादा, दुर्घटनाएं भी अधिक हुईं

शहर के निवासी संतोष जायसवाल ने बताया कि रात में सड़क पर मवेशियों को पहचानना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना दोगुनी हो जाती है उन्होंने कहा कि वे खुद कई बार दुर्घटनाओं से बाल-बाल बचे हैं। इसी तरह आकाश कुमार ने कहा कि हर बार हाईकोर्ट आदेश देती है, तब प्रशासन हरकत में आता है. लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही स्थिति हो जाती है उन्होंने बताया कि पहले पशुपालकों पर एफआईआर की कार्रवाई होती थी, लेकिन अब वह भी ठप हो चुकी है।

कई इलाकों में गंभीर स्थिति

शहर के इमलीपारा, पुराना बस स्टैंड, नया बस स्टैंड रोड, उसलापुर, कोनी रोड, गांधी चौक, सरकंडा और यहां तक कि कलेक्ट्रेट के आसपास भी मवेशियों की मौजूदगी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। नागरिकों का कहना है कि अब यह स्थिति सामान्य नहीं बल्कि खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। लोगों का कहना है कि आवारा मवेशियों की समस्या अब केवल प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का अहम विषय बन चुकी है। नागरिकों का मानना है कि शासन-प्रशासन को एक ऐसी स्थायी व्यवस्था लागू करनी चाहिए जिससे सड़कों पर इंसान और पशु दोनों सुरक्षित रह सकें।

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