

बिलासपुर। आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत पढ़ने वाले बच्चों से स्कूल परिसर में पुताई और निर्माण कार्य कराने के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गंभीर रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि घटना की सच्चाई की जांच के लिए 23 फरवरी को एक जांच समिति गठित कर दी गई है। इस पर हाई कोर्ट ने शिक्षा सचिव को 11 मार्च 2026 तक विस्तृत जानकारी के साथ शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

सूरजपुर के तिलसिवां स्थित स्कूल का मामला
मामला सूरजपुर जिले के तिलसिवां स्थित मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल तिलसिवां से जुड़ा है। आरोप है कि स्कूल की प्राचार्य विधु शर्मा ने आरटीई के तहत अध्ययनरत गरीब बच्चों से स्कूल परिसर में मजदूरी और पुताई का काम कराया। अभिभावकों की शिकायत के अनुसार बच्चों से सीमेंट और रेत ढुलवाने, कक्षाओं की पुताई कराने जैसे कार्य कराए गए।

परिजनों का आरोप है कि काम करने से मना करने पर बच्चों को स्कूल से निकालने की धमकी दी जाती थी। जब अभिभावक इस संबंध में चर्चा करने स्कूल पहुंचे तो उनके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्राचार्य ने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को मुफ्त में बैग, किताबें और अन्य सुविधाएं मिल रही हैं, इसलिए बाहर जाकर बात करें।
अभिभावकों ने बच्चों के काम करते हुए फोटो और वीडियो साक्ष्य जिला प्रशासन को सौंपे हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि स्कूल की एक कक्षा का उपयोग प्राचार्य द्वारा निजी निवास के रूप में किया जा रहा है।
मामले को लेकर अब हाई कोर्ट की सख्ती के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
