

रायपुर-दुर्ग के बाद बिलासपुर में सर्वाधिक पेंडेंसी, हितग्राही परेशान
बिलासपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को आधार से जोड़ने के लिए कराई जा रही ई-केवाईसी की प्रक्रिया भले ही सरकारी आंकड़ों में 90 प्रतिशत के करीब पहुंच चुकी हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग तस्वीर पेश कर रही है। प्रदेश में अब भी 22 लाख 94 हजार से अधिक लोगों की ई-केवाईसी लंबित है, जिसके चलते उनका राशन रोका गया है। जब तक संबंधित सदस्य ई-केवाईसी नहीं कराएंगे, उन्हें राशन का लाभ नहीं मिलेगा।
प्रदेश में कुल 82 लाख 58 हजार 375 राशनकार्ड हैं, जिनमें 2.73 करोड़ से अधिक सदस्य दर्ज हैं। इसके बावजूद 5 लाख से ज्यादा राशनकार्डों पर दर्ज लाखों सदस्यों की ई-केवाईसी नहीं हो सकी है। खाद्य विभाग के अनुसार सभी सदस्यों की ई-केवाईसी अनिवार्य कर दी गई है।
रायपुर-दुर्ग के बाद बिलासपुर तीसरे स्थान पर
जिलावार आंकड़ों के अनुसार सर्वाधिक पेंडेंसी रायपुर जिले में है, जहां 2 लाख 29 हजार 301 सदस्यों की ई-केवाईसी बाकी है। दूसरे स्थान पर दुर्ग है, जहां 1 लाख 47 हजार 466 लोग प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं।
बिलासपुर जिले में कुल 18 लाख 39 हजार 995 राशनकार्ड सदस्य दर्ज हैं। इनमें से 16 लाख 31 हजार 245 की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है, लेकिन अब भी 1 लाख 45 हजार 245 सदस्य इस प्रक्रिया से बाहर हैं।
इसके अलावा सरगुजा, बलौदाबाजार, बस्तर, जांजगीर-चांपा, जशपुर, कोरबा और महासमुंद जिलों में भी हजारों की संख्या में लोग ई-केवाईसी नहीं करा पाए हैं, जिससे उनका राशन वितरण प्रभावित हो रहा है।
ऐसे कराएं ई-केवाईसी
ई-केवाईसी कराने के लिए हितग्राही को अपने नजदीकी उचित मूल्य दुकान में आधार कार्ड के साथ जाना होगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य का आधार कार्ड अनिवार्य है। पीओएस मशीन के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठा या आंख का स्कैन) होते ही ई-केवाईसी पूरी हो जाती है।
यदि बायोमेट्रिक फेल हो जाए तो दूसरी उंगली या आंख से प्रयास किया जा सकता है। समस्या बनी रहने पर कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) या लोक सेवा केंद्र में जाकर आधार और राशन कार्ड का मिलान कर ई-केवाईसी कराई जा सकती है। यहां नाम, जन्मतिथि या फोटो में त्रुटि भी सुधारी जा सकती है।
ये हैं प्रमुख कारण
ई-केवाईसी लंबित रहने के पीछे कई कारण सामने आए हैं—
बायोमेट्रिक फेल होना
आधार अपडेट न होना
सर्वर की तकनीकी दिक्कतें
दूसरे जिलों या राज्यों में पलायन
भौतिक सत्यापन में देरी
ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्ग, दिव्यांग और गरीब परिवारों को बार-बार राशन दुकानों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे आमजन में नाराजगी भी बढ़ रही है।
विभाग का पक्ष
खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर ने कहा है कि सभी राशनकार्ड सदस्यों की ई-केवाईसी अनिवार्य है। हितग्राही जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
लगातार बढ़ती पेंडेंसी के बीच सवाल यह है कि महज पांच मिनट की प्रक्रिया के लिए लाखों लोगों का राशन क्यों अटका हुआ है। प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि तकनीकी और जमीनी समस्याओं का समाधान कर हितग्राहियों को राहत दिलाई जाए।
