

बिलासपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने दिल्ली लायंस सर्विसेस को एक वर्ष का एक्सटेंशन देते हुए निकाय मद से 50 करोड़ 93 हजार रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय की जानकारी नगर निगम की सामान्य सभा में देना अनिवार्य होगा।
दरअसल, नगर निगम की एमआईसी ने 30 दिसंबर 2025 की बैठक में इस प्रस्ताव को सीधे शासन को भेज दिया था, जबकि नियमानुसार इसे पहले सामान्य सभा में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। नियमों के अनुसार एमआईसी को केवल 3 करोड़ रुपए तक के प्रस्ताव पारित करने का अधिकार है, लेकिन इससे अधिक राशि का प्रस्ताव शासन को अग्रेषित कर दिया गया।
नगरीय प्रशासन विभाग ने वित्तीय मंजूरी तो दे दी है, परंतु निगम को निर्देशित किया है कि सामान्य सभा को इस संबंध में विधिवत सूचित किया जाए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य सभा को सूचना दिए जाने की प्रत्याशा में ही स्वीकृति प्रदान की गई है।
56 से 70 वार्ड होने के बाद बढ़ा खर्च
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में कंपनी को शहर की जीआईएस बेस्ड मैकेनाइज्ड एवं मैकेनिकल स्वीपिंग का ठेका दिया गया था। उस समय निगम क्षेत्र में 56 वार्ड थे। बाद में 18 गांवों को निगम सीमा में शामिल किए जाने के बाद वार्डों की संख्या बढ़कर 70 हो गई। विस्तारित क्षेत्र में सफाई व्यवस्था के लिए नए सिरे से ठेका किया गया।
अगस्त 2018 में कंपनी को 1 करोड़ 55 लाख 75 हजार रुपए प्रतिमाह (करीब 18 करोड़ 69 लाख रुपए प्रतिवर्ष) की दर से तीन वर्षों के लिए ठेका दिया गया था। टेंडर शर्तों के अनुसार प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान था। अगस्त 2019 में अवधि समाप्त होने पर एमआईसी के प्रस्ताव से दो वर्ष का एक्सटेंशन अगस्त 2023 तक दे दिया गया। इसके बाद भी कंपनी बिना विधिवत एक्सटेंशन के कार्य करती रही।
वर्ष 2025 में इसी कंपनी को लगभग 47.6 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष की दर से जीआईएस बेस्ड मैकेनाइज्ड सफाई का ठेका दिया गया है। पहले जहां सालाना लगभग 18 करोड़ रुपए खर्च हो रहे थे, वहीं अब यह व्यय बढ़कर करीब 48 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
इस पूरे मामले को लेकर निगम की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन पर सवाल उठने लगे हैं। अब सामान्य सभा में इस विषय पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
