मातृ-शिशु अस्पताल में डिलीवरी के बदले पैसे मांगने का आरोप, दो स्टाफ नर्स निलंबित; तीन डॉक्टरों की जांच टीम गठित


बिलासपुर के जिला अस्पताल परिसर के पीछे स्थित मातृ-शिशु अस्पताल में प्रसूता के परिजनों से डिलीवरी के एवज में पैसे मांगने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्टाफ नर्स लक्ष्मी वर्मा और संजू चौरसिया पर परिजनों से नकद राशि मांगने का आरोप लगा है। वीडियो सामने आते ही अस्पताल प्रबंधन ने दोनों नर्सों को तत्काल निलंबित कर दिया है।
“धन्यवाद से काम नहीं चलेगा…”
वायरल वीडियो में परिजन नर्स को धन्यवाद देते सुनाई देते हैं, जिस पर कथित रूप से नर्स कहती हैं, “धन्यवाद से काम नहीं चलेगा… बेटा हुआ है, एक मैं लूंगी और पांच इनको दे दो।” बातचीत में यह भी सुनाई देता है कि परिजन 500 रुपये देने की बात करते हैं, लेकिन नर्स 1000 रुपये से कम लेने से इनकार करती हैं। वीडियो में यह भी कहा गया कि “सरकारी अस्पताल है भैया, यहां एक ग्लव्स भी नहीं है… यहां सब कुछ का पैसा लगता है। अगर नहीं है तो मत दीजिए, लेकिन एक से कम नहीं लूंगी।”
प्रबंधन की कार्रवाई: तत्काल निलंबन
मामले की जानकारी मिलते ही सिविल सर्जन डॉ. अनिल गुप्ता ने दोनों नर्सों को लेबर ओटी से हटाने और निलंबन की पुष्टि की। जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है, जिसमें डॉ. प्रतीक प्रधान, डॉ. ममता सलूजा और डॉ. नवीन साव शामिल हैं।
इधर कलेक्टर संजय अग्रवाल की फटकार के बाद निलंबन आदेश जारी किया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पताल में इलाज या डिलीवरी के बदले पैसे मांगना गलत है और जांच के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई होगी।
पहले भी लग चुके हैं आरोप
जिला अस्पताल में पहले भी मरीजों से “खर्चापानी” मांगने के आरोप लग चुके हैं। एक पूर्व मामले में तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण द्वारा एक डॉक्टर को निलंबित किया गया था।
केस 1: एक महिला विशेषज्ञ पर ऑपरेशन के बदले 15 हजार रुपये लेने का आरोप लगा था।
केस 2: एक वरिष्ठ डॉक्टर पर सामान्य डिलीवरी के लिए 3 हजार रुपये मांगने का आरोप लगा, लेकिन साक्ष्य के अभाव में कार्रवाई नहीं हो सकी।
शिकायत की अपील
सिविल सर्जन डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी इलाज के बदले पैसे मांगता है तो परिजन रसीद मांगें और लिखित शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने माना कि पूर्व में भी लेन-देन के मामले सामने आए हैं, परंतु इस बार वायरल वीडियो के आधार पर त्वरित कार्रवाई की गई है।
फिलहाल जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले ने सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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