एमआईसी मेंबर बंधु मौर्य की हत्या की सुपारी मामले में एससी मोर्चा मंडल अध्यक्ष निष्कासित, आदतन अपराधी को दी थी 25 लाख की सुपारी

राजू सोनकर


भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बेलतरा पूर्वी मंडल के अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष राजू सोनकर को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई भाजपा पार्षद व एमआईसी सदस्य बंधु मौर्य की हत्या की सुपारी देने के आरोपों के सामने आने के बाद की गई।
25 लाख में हत्या की सुपारी, 6 लाख एडवांस
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि राजू सोनकर ने शहर के निगरानी बदमाश नारद उर्फ सुमित श्रीवास को 25 लाख रुपये में बंधु मौर्य की हत्या की सुपारी दी थी। इसके एवज में 6 लाख रुपये एडवांस देने की बात भी सामने आई है। मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने राजू सोनकर और नारद उर्फ सुमित श्रीवास को गिरफ्तार कर लिया।

नारद श्रीवास


तीन दिन बाद पार्टी की कार्रवाई
भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष मोहित जायसवाल ने विज्ञप्ति जारी कर राजू सोनकर को पद से हटाने की पुष्टि की। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव और संगठन महामंत्री पवन साय सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को दे दी गई है। मंडल अध्यक्ष पवन कश्यप की पुष्टि के बाद यह कार्रवाई की गई। राजू सोनकर के स्थान पर विकास कुर्रे को बेलतरा पूर्वी मंडल का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
जानकारी के अनुसार, बंधु मौर्य के परिसर में किराए की दुकान पर पिछले करीब 10 वर्षों से राजू सोनकर नारियल बेचने का व्यवसाय करता था। आरोप है कि नारियल बिक्री की आड़ में वह गांजा तस्करी में भी लिप्त था। जब बंधु मौर्य को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने सोनकर को दुकान खाली करने के लिए कहा। इसी विवाद के बाद कथित तौर पर सोनकर ने हत्या की साजिश रची।
बताया जा रहा है कि नारद श्रीवास, जो कि आदतन अपराधी बताया जाता है, की मदद से उत्तर प्रदेश से शूटर बुलवाए गए थे। 18 दिसंबर को शनिचरी मार्केट से घर लौटते समय दो चोरी की मोटरसाइकिल पर सवार शूटरों ने बंधु मौर्य की कार को रोकने का प्रयास किया था, लेकिन उन्होंने वाहन की रफ्तार बढ़ाकर वहां से निकल गए। उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनकी जान लेने की कोशिश की जा रही है।
संपत्ति जांच की उठी मांग
मामले के सामने आने के बाद बंधु मौर्य ने भी आरोप लगाया कि राजू सोनकर गांजा तस्करी में लिप्त रहा है और पिछले कुछ वर्षों में अर्जित उसकी संपत्तियों की जांच होनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने पहले ही सोनकर की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे। अब गिरफ्तारी और निष्कासन के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।
पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!