बांगला भाषा संस्कृति का संवाहक बना छत्तीसगढ़ बांगला अकादमी बिलासपुर


छत्तीसगढ़ बांगला अकादमी द्वारा 21 फरवरी को टिकरापारा स्थित बंग भवन में अपनी 238 वां मासिक साहित्य सभा के साथ अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम का प्रारंभ संस्थागत गीत “आभार भाषा तोमार भाषा” से हुई। इसके बाद अध्यक्ष श्रीमती नमिता घोष ने मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “मां, मातृभूमि और मातृभाषा- ये तीनों हमारे जीवन में सबसे अधिक सम्मानित होते हैं।मुख्य वक्ता डॉ गोपाल चंद्र मुखर्जी, डॉ सोमा लाहिड़ी मल्लिक एवं श्री अजय कुमार गांगुली द्वारा विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मातृभाषा बांगला को कैसे मान्यता प्राप्त हुई, उक्त भाषा के सम्मान एवं उसके संरक्षण हेतु विभिन्न बिंदुओं पर अपने अपने विचार व्यक्त किए गए।


मुख्य अतिथि श्री पल्लव धर छत्तीसगढ़ बंगाली समाज के प्रदेश अध्यक्ष एवं भा.ज.पा. जनकल्याण मंच के प्रदेश प्रवक्ता द्वारा कार्यक्रम के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की गई।
संगठन के सक्रिय सदस्य स्व. अमित चक्रवर्ती के आकस्मिक निधन पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किये गए। श्रीमती रीता कर्मकार को विदाई संवर्धना “स्व.रामजीवन मुखर्जी” सम्मान से संवर्धित किया गया। निहार रंजन मल्लिक द्वारा निर्देशित मातृभाषा पर आधारित समूह संगीत में गायन की प्रस्तुतियां मौमिता मुखर्जी , मल्लिका सरकार, अनिता गोलदार, स्वागता चौधरी, रेबा चौधरी, डॉ सोमा लाहिड़ी मल्लिक, मोनिका घोष, गोपा दासगुप्त, प्रतिमा पाल, मौसमी सौरभ चक्रवर्ती, असित बरन उमा दास, देवाशीष सरकार, निहार, अचिन्त्य कुमार बोस, प्रबाल मुखर्जी आदि द्वारा दिए गए।


एकल संगीत शुभ्रांशु शेखर घोष, अचिन्त्य कुमार बोस, दुलाल मंडल, स्वागता चौधरी, महुआ नंदी ने अपने सुमधुर गीतों के साथ दिए।
कविता पाठ रुपा राहा एवं आयुष प्रामाणिक द्वारा किया गया। असित बरन दास द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक “मानुष ओ भाषा ” में असित, देवाशीष सरकार, पार्थ सारथी बोस, प्रबाल मुखर्जी, रीता कर्मकार, मौमिता चक्रवर्ती, प्रतिमा पाल शामिल रहे। तबला संगत जय डे ने किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन सचिव राजा दासगुप्त ने करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ बांगला अकादमी बिलासपुर में एकमात्र ऐसा संस्था है जो प्रति वर्ष निष्ठा और समर्पण के साथ मातृभाषा दिवस मनाता है।
आयोजन का संपूर्ण प्रबंधन प्रबाल मुखर्जी, गोपा दासगुप्त, प्रतिमा पाल एवं अन्य ने किया, जिसमें अचिन्त्य बोस का विशेष योगदान रहा। धन्यवाद ज्ञापन असित बरन दास ने किया।

इस अवसर पर अभिजीत रिंकू मित्रा, देवाशीष नंदी, विलास दास, शुभ्रा दत्ता, संगीत मोइत्रा, प्रबीर छंदा घोष, सुब्रतो झरना चट्टोपाध्याय, भक्तिमय चौधरी, हांसी बनर्जी, मीनू दास, गोपा बागची, रूमा सिन्हा, बंदना राय सहित बड़ी संख्या में सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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