

बिलासपुर
गांधी चौक से तारबाहर तक सड़क निर्माण का कार्य भले ही पूरा हो चुका हो, लेकिन प्रोजेक्ट के अंतिम हिस्से में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 2.15 करोड़ रुपये की लागत से बनी 1.10 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण में मूल प्रस्ताव से हटकर लगभग 300 मीटर हिस्से में डामर हटाकर करीब डेढ़ फीट ऊंची कांक्रीट सड़क बना दी गई। यह बदलाव न तो मूल योजना में शामिल था और न ही इसके लिए किसी अतिरिक्त स्वीकृति की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार तारबाहर चौक स्थित रसोई होटल को लाभ पहुंचाने के लिए सड़क के मूल प्रस्ताव में मनमाना बदलाव किया गया। जबकि गांधी चौक से तारबाहर चौक तक डामरीकरण और डिवाइडर निर्माण को ही मंजूरी दी गई थी। इसके बावजूद होटल के सामने का हिस्सा सीसी रोड में बदल दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि डामर और कांक्रीट सड़क की लागत में दो से तीन गुना तक का अंतर होता है, ऐसे में बिना उच्च स्तरीय वित्तीय और तकनीकी स्वीकृति के यह बदलाव नियमों के विपरीत माना जा रहा है।
अधिकारियों की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि नाली और जलभराव की समस्या के चलते कांक्रीट सड़क बनाई गई, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि यह समस्या पहले से थी तो इसे प्रारंभिक योजना में क्यों शामिल नहीं किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर नाली होने का दावा किया जा रहा है, वहां न तो नई नाली बनाई गई है और न ही कोई नया चबूतरा निर्मित हुआ है।
ऊंचाई बढ़ने से हादसे का खतरा
होटल के सामने डामर सड़क के बाद अचानक करीब एक फीट ऊंची कांक्रीट सड़क शुरू हो जाती है। इससे खासकर तेज रफ्तार वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। रात के समय यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, जब वाहन चालक अचानक सड़क की ऊंचाई बदलने का अंदाजा नहीं लगा पाते।
15 दिन तक बैरिकेड लगाकर बंद रही सड़क
कांक्रीट सड़क निर्माण के दौरान होटल के सामने का हिस्सा करीब 15 दिनों तक बैरिकेड लगाकर बंद रखा गया। इससे लोगों को एकतरफा आवागमन करना पड़ा और दुर्घटना की आशंका बनी रही। बताया जा रहा है कि मीडिया द्वारा सवाल उठाए जाने के कुछ ही देर बाद वहां से बैरिकेड हटा लिए गए।
सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप
निर्माण के लिए पुरानी सड़क की मोटी परत उखाड़ दी गई, जिसे लेकर विशेषज्ञों ने सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि कांक्रीट सड़क की आवश्यकता थी तो पहले संशोधित प्रस्ताव बनाकर वित्तीय मंजूरी ली जानी चाहिए थी। निर्माण के अंतिम चरण में किया गया यह बदलाव पूरे प्रोजेक्ट को विवादों में ले आया है।
अधिकारियों के बयान
रसोई वेज होटल के संचालक मुकेश चौकसे ने कहा कि सड़क पर बैरिकेड पीडब्ल्यूडी की ओर से लगाए गए थे। नाली पर चबूतरा बनाकर अतिक्रमण की बात कही जा रही है, जबकि वहां कोई नई नाली नहीं है और चबूतरा पहले से बना हुआ है।
वहीं पीडब्ल्यूडी डिवीजन-1 के कार्यपालन अभियंता सीएस विंध्यराज ने कहा कि उन्हें इस संबंध में अभी जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि डामर की जगह कांक्रीट सड़क बनाए जाने के कारणों पर एसडीओ से रिपोर्ट तलब की जाएगी।
पीडब्ल्यूडी बिलासपुर सर्कल के चीफ इंजीनियर आरके रात्रे ने कहा कि कांक्रीट सड़क को सेट होने और पकने में समय लगता है, इसी कारण बैरिकेड लगाए गए थे।
