
शशि मिश्रा

जिले के ईदगाह चौक पर पिछले 25 सालों से चल रहे फूल बाजार को व्यापार विहार में शिफ्ट किया जा रहा है। पांच साल पहले जहां पौनी पसारी योजना के तहत 26 लाख में सब्जी बाजार स्थापित किया गया था, वह वीरान हो गया है। फूल बाजार यहीं लगाया जाएगा।
निगम इसके लिए शेड, पार्किंग और दूसरी व्यवस्था कर रहा है। इधर व्यापारियों का कहना है कि यहां की 31 दुकानें और 400 से अधिक कारीगरों की आजीविका फूलों के इस व्यवसाय से जुड़ी है। यदि सुविधाओं के साथ नया बाजार मिलता है, तो वे शिफ्ट होने के लिए तैयार हैं। व्यापारियों के मुताबिक
कोई भी जगह जो कि शहर के बीच में हो वहां गुमटी बनाकर स्थायी तौर पर दे दी जाए तो वे लोग जाने को तैयार हैं। इस तरह से बार बार हटाना सही नहीं है। व्यापारियों ने गोंड़पारा में आर्य समाज भवन के सामने जगह की मांग की है।
ध्यान रहे कि शहर में फूलों का व्यवसाय शहर में तेजी बढ़ा है। खास तौर पर जेल चौक की 30 से अधिक दुकानों में सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक रौनकता रहती है। ग्राहकों को उनके मनपसंद फूलों के साथ- साथ बेलपान, दुबी के धतुरा व बेल फल भी उपलब्ध हो जाते हैं। इतना ही नहीं मोंगरा, मदार से गेंदे के फूल का हार भी मिल जाता है। यहां के लेकिन छोटे व्यापारियों को लेकिन फिर से दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा रहा है।
निगम स्थायी व्यवस्था नहीं कर पा रहा
गौरतलब है कि जेल चौक में फुल बाजार 2001 से लगना शुरू हुआ है। इससे पहले गोलबाजार चौक में यह बाजार लगता था। बढ़ते भीड़ को देखते हुए निगम ने बाद में इसे मिशन अस्पताल के पीछे जेल चौक वाले रास्ते में शिफ्ट करने का फैसला लिया था। तब से लेकर इस जगह पर 31 व्यापारी लगातार अपनी दुकानें लगाते हैं। यहां कारोबार करने वाले राशि माली, विजय साहू और रतन कश्यप ने बताया कि निगम कोई भी स्थायी व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। जेल चौक में दुकानें स्थापित हो गई है और शहर ही नहीं आसपास के लोग यहां फुल, माला लेने पहुंचते है।
400 से अधिक कारीगर और श्रमिक जुड़े हैं
व्यापारियों का कहना है कि यह मार्केट 25 साल पुराना है और यहां फूलों की 31 दुकानें हैं। इस जगह से हमें काफी ज्यादा लगाव हो गया है, क्योंकि वर्षों से हमारे ग्राहक इन्हीं स्थानों पर आकर खुशी-खुशी फूल खरीदकर ले जाते हैं। इसलिए इस जगह से दूर नहीं होना चाहते हैं. लेकिन प्रशासन का सहयोग करना भी जरूरी है। व्यापारियों ने निगम से व्यवस्थित दुकानें, पार्किंग और सामुदायिक शौचालय जैसी सुविधाओं की मांग की है। उनका कहना है कि पार्किंग की कमी के कारण जाम की समस्या होती है। दूल्हा गाड़ी और ग्राहकों की गाड़ियां सड़क पर खड़ी रहती है। फूल बाजार में काम करने वाले 400 से अधिक कारीगर और श्रमिक अपनी आजीविका इसी व्यवसाय से चलाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि नया बाजार सुविधाजनक और व्यवस्थित होगा, तो वे निगम द्वारा तय शुल्क देने के लिए भी तैयार हैं।
