

सिटी रिपोर्टर | बिलासपुर
विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का पावन पर्व बसंत पंचमी इस वर्ष 23 जनवरी को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन कुमार, रवि, परिध और शिव योग जैसे कई दुर्लभ एवं शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। पंडितों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन किए गए कार्य विशेष फलदायी होते हैं।
व्यंकटेश मंदिर के महंत डॉ. कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य ने बताया कि पंचमी तिथि 22 जनवरी की देर रात 2:29 बजे प्रारंभ होकर 23 जनवरी की देर रात 1:47 बजे तक रहेगी। इस दौरान मध्याह्न काल में उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और शिव योग का संयोग रहेगा। ऐसे में यह दिन अबूझ मुहूर्त माना जा रहा है, जिसमें गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नौकरी व व्यापार की शुरुआत, वाहन या अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की खरीदारी अत्यंत शुभ मानी जाती है।
बसंत पंचमी पर घरों, मंदिरों और शिक्षण संस्थानों में दिनभर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना होगी। संगीत और कला से जुड़े कलाकार अपने वाद्य यंत्रों पर तिलक कर देवी की आराधना करेंगे। पीले वस्त्र धारण करना, पीले रंग का भोजन, चावल-दाल, गुड़ आदि का दान करना विशेष शुभ माना गया है।
इधर, बसंत उत्सव के अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ विनोबा नगर द्वारा तीन दिवसीय आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को जीवंत झांकियों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जो गायत्री शक्तिपीठ से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर में संपन्न हुई। इस अवसर पर पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के आध्यात्मिक जन्मदिवस का भी आयोजन किया जा रहा है।
22 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक सामूहिक अखंड गायत्री जप किया गया, जबकि बसंत पंचमी 23 जनवरी को सुबह 8 से 11 बजे तक 9 कुंडीय गायत्री महायज्ञ, मां सरस्वती का विशेष पूजन एवं संस्कार कार्यक्रम होंगे। शाम 6 से 8 बजे तक गायत्री दीप महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
खरमास समाप्त होने के बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो चुकी है। 4 फरवरी से विवाह मुहूर्त भी प्रारंभ होगा। ज्योतिषियों के अनुसार 23 जनवरी को बसंत पंचमी के साथ रवि, परिध और शिव योग होने से सगाई, आभूषण, वस्त्र, पूजा सामग्री और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी के लिए यह दिन अत्यंत श्रेष्ठ है।
