

बिलासपुर। किफायती जन आवास नियम के तहत राज्य में पहली बार छोटे भू-स्वामियों और मध्यम स्तर के बिल्डर्स को योजनाबद्ध तरीके से आवासीय कॉलोनी विकसित करने का अवसर मिला है। नई नियमावली से न केवल निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों का सुव्यवस्थित कॉलोनी में रहने का सपना साकार होगा, बल्कि लंबे समय से पनप रही अवैध प्लाटिंग पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।
नई नीति के तहत अब कृषि भू-उपयोग वाली भूमि पर भी आवासीय कॉलोनी विकसित करने की अनुमति दी गई है। जन आवास विकास के लिए न्यूनतम भूमि सीमा 2 एकड़ से 10 एकड़ तक निर्धारित की गई है, जिससे छोटे भू-स्वामी भी बड़े निवेश के बिना कॉलोनी विकास कर सकेंगे। नियमों के अनुसार यदि योजना इन प्रावधानों के अंतर्गत स्वीकृत होती है, तो कृषि से आवासीय भू-उपयोग में परिवर्तन स्वतः मान्य होगा।
किफायती जन आवास का दायरा भी स्पष्ट कर दिया गया है। इसके अंतर्गत भू-खण्ड का अधिकतम क्षेत्रफल 150 वर्ग मीटर तथा फ्लैट इकाई का अधिकतम आकार 90 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है। इससे आम परिवारों के लिए आवास की कीमतें नियंत्रित रहेंगी और उन्हें टीएनसी एवं रेरा अनुमोदित कॉलोनियों में सुरक्षित निवेश का अवसर मिलेगा।
जन आवास नियम–2025 की प्रमुख विशेषताएं
न्यूनतम भूमि सीमा: 2 से 10 एकड़
कृषि भूमि पर कॉलोनी विकास की अनुमति
भू-खण्ड अधिकतम 150 वर्ग मीटर, फ्लैट 90 वर्ग मीटर
टीएनसी एवं रेरा अनुमोदन अनिवार्य
अवैध प्लाटिंग पर प्रभावी रोक
कॉलोनी विकास हुआ आसान
सरकार ने पहुंच मार्ग और आंतरिक सड़कों की चौड़ाई में भी शिथिलता दी है, जिससे छोटे स्तर पर कॉलोनी विकास संभव हो सकेगा। इसके साथ ही प्रत्येक जन आवास कॉलोनी में सामुदायिक खुला स्थान, आवश्यक एमेनिटीज, कम्युनिटी हॉल या क्लब हाउस तथा सीमित व्यावसायिक क्षेत्र आरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है।
एकल आवेदक के साथ-साथ अब संयुक्त अथवा अनुबंध के आधार पर आवेदन की सुविधा भी दी गई है, जिससे बिल्डर्स और भूमि-स्वामियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी छोटे भू-खण्डों पर नियोजित और वैध कॉलोनी विकास का रास्ता अब आसान हो गया है।
