

बिलासपुर।
भिलाई स्टील प्लांट में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उसे अग्रिम जमानत दिया जाना उचित नहीं है।
मामले के अनुसार वर्ष 2019 में दल्लीराजहरा निवासी आरोपी श्रीकांत झा ने शिकायतकर्ता नागेश्वर साहू को भिलाई स्टील प्लांट में नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। इसके बदले आरोपी ने 10 लाख रुपये की मांग की। शिकायत में बताया गया कि आरोपी के कहने पर नागेश्वर साहू के बैंक खाते के माध्यम से कुल 21 लाख 70 हजार रुपये का लेनदेन किया गया।
इसके अलावा आरोपी श्रीकांत झा पर भूषण साहू, देवेंद्र कुमार, तामेंद्र कुमार समेत अन्य कई लोगों से भी पैसे लेकर वापस नहीं करने के आरोप हैं। मामले में बालोद जिले के राजहरा थाना में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। याचिका में आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि उसे झूठा फंसाया गया है और घटना के करीब छह साल बाद एफआईआर दर्ज की गई है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया गया कि आरोपी आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ वर्ष 2002 से अब तक हत्या, मारपीट, गाली-गलौज और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित गंभीर धाराओं में कुल सात आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट के इस फैसले के बाद आरोपी की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।
