

बिलासपुर।
साइबर ठगों ने अब ठगी का तरीका बदल दिया है। साइबर फ्रॉड के दूसरे चरण में ठग सरकारी कर्मचारियों और पुलिस जवानों के मोबाइल हैक कर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। शुक्रवार शाम ट्रैफिक पुलिस के हेड कांस्टेबल जावेद खान का मोबाइल हैक कर लिया गया। इसके बाद ठगों ने उनके मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद सभी व्हाट्सएप नंबरों पर आरटीओ चालान के नाम से एपीके फाइल भेज दी।
इस फर्जी फाइल को ट्रैफिक पुलिस के एसीसीयू एएसपी अनुज कुमार समेत कई लोगों को भेजा गया। देर रात एसीसीयू की मदद से हेड कांस्टेबल का मोबाइल ठीक कराया गया। इसके बाद जावेद खान ने सभी परिचितों को मैसेज और कॉल कर एपीके फाइल डाउनलोड न करने की चेतावनी दी।
बिना ओटीपी और एप डाउनलोड कराए खाली हुआ खाता
इधर तारबाहर थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तारबाहर स्थित एक अपार्टमेंट निवासी युगल किशोर मुंदडा (50) गुरुवार रात घर पर थे। खाना खाने के बाद वे अपने कमरे में सोने चले गए। कुछ देर बाद उनके मोबाइल पर बैंक खाते से पैसे कटने के लगातार मैसेज आने लगे।
जब उन्होंने बैलेंस चेक किया तो पता चला कि उनके खाते से चार बार में कुल 49 हजार 998 रुपए निकल चुके हैं। हैरानी की बात यह रही कि न तो उन्होंने किसी को ओटीपी बताया और न ही कोई एप डाउनलोड किया था। पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात ठगों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रिटायर्ड अफसर से एपीके फाइल के जरिए लाखों की ठगी
इससे पहले 26 दिसंबर को न्यायालय के रिटायर्ड उपसंचालक अभियोजन अधिकारी गया प्रसाद मालवीय भी साइबर ठगी के शिकार हो चुके हैं। ग्रीन होम्स निवासी मालवीय की पत्नी के व्हाट्सएप नंबर पर आरटीओ के नाम से एपीके फाइल वाला ई-चालान भेजा गया था। फाइल डाउनलोड करते ही ठगों ने उनके बैंक खाते से 5 लाख 75 हजार रुपए ट्रांसफर कर लिए।
पीड़ित ने तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की, जिससे 66 हजार रुपए होल्ड हो गए, लेकिन बाकी रकम ठग निकाल चुके थे। सकरी पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साइबर फ्रॉड के नए तरीके
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार ठग अब दूसरे चरण में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं—
एआई डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग – ठग एआई की मदद से किसी करीबी की आवाज और चेहरा क्लोन कर वीडियो कॉल करते हैं और मदद के नाम पर ठगी करते हैं।
स्क्रीन शेयरिंग और रिमोट एक्सेस – फर्जी हेल्पलाइन नंबर देकर एनीडेस्क या टीमव्यूअर जैसे एप डाउनलोड कराते हैं, जिससे मोबाइल का पूरा कंट्रोल ठगों के हाथ में चला जाता है।
सर्च इंजन मैनिपुलेशन – गूगल पर बैंक या कस्टमर केयर नंबर सर्च करने पर ठगों के फर्जी नंबर ऊपर दिखते हैं, जिन पर कॉल करते ही लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं।
बचाव के उपाय
साइबर ठगी से बचने के लिए व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और बैंक एप पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर ऑन रखें। गूगल से मिले अनजान नंबरों पर भरोसा न करें, किसी भी एपीके फाइल को डाउनलोड न करें, अनजान वीडियो कॉल न उठाएं और सरकारी एजेंसियों के नाम से आने वाले संदिग्ध कॉल को नजरअंदाज करें।
पुलिस ने आम नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत 1930 हेल्पलाइन पर करने की अपील की है।
