4 thoughts on “जबरन दुकानों को बंद कराने निकले भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने बंद विरोधियों के साथ की मारपीट, पुलिस बनी मूकदर्शक, बंद विरोधियों के खिलाफ ही किया मामला दर्ज

  1. अपनी जातिवादी मनुवादी मानसिकता को लेकर इस आर्टिकल को लिखा गया हैं । आंदोलन समर्थित लोगों के द्वारा किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं की गई है बल्कि जिनके ऊपर अपराध दर्ज हुआ है वे लोग हिंसा करने पर आतुर थे
    सालों से वर्चस्व वादी मानसिकता के ऊपर कुठाराघात
    से जो पीड़ा हो रही है देखा जा सकता है

  2. आर्टिकल लिखने वाले को शायद पता नहीं है कि राजनीतिक आरक्षण केवल 10 साल के लिए था नौकरियों में आरक्षण की कोई अवधि निश्चित नहीं है

  3. Fack News hai
    Jo yovak ko mar pada hai vo अप शब्दो का उपयोग कर रहा था और सब गाली दे रहा था।

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