
बिलासपुर। शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश ने शहर में जनजीवन के साथ-साथ पेट्रोल पंप संचालकों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। व्यापार विहार, तिफरा, सरकंडा, मंगला सहित शहर के कई पेट्रोल पंपों के अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंकों में बारिश का पानी घुसने की जानकारी सामने आई है। इससे हजारों लीटर ई-20 पेट्रोल खराब हो गया है और दूषित ईंधन से वाहनों के इंजन खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।
जानकारी के अनुसार, शहर के कई पेट्रोल पंपों पर जलभराव के कारण पानी स्टोरेज टैंकों तक पहुंच गया। इसके चलते पेट्रोल में पानी मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर वाहन चालकों ने पेट्रोल भरवाने के बाद गाड़ियों के अचानक बंद होने और इंजन खराब होने की शिकायत भी की है।
पेट्रोल भरवाने के बाद बंद हुई गाड़ी, ग्राहक और पंप कर्मियों में विवाद
सरकंडा स्थित समृद्धि फ्यूल पेट्रोल पंप पर एक ग्राहक की बाइक पेट्रोल भरवाने के कुछ ही देर बाद बंद हो गई। मैकेनिक द्वारा जांच करने पर इंजन में पानी मिश्रित ईंधन पहुंचने की बात सामने आई। इसे लेकर ग्राहक और पंप कर्मचारियों के बीच विवाद की स्थिति भी बन गई।
ई-20 पेट्रोल में पानी पहुंचते ही होता है ‘फेज सेपरेशन’
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में उपयोग हो रहे ई-20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिला होता है। एथेनॉल पानी के संपर्क में आते ही पेट्रोल से अलग होकर नीचे बैठ जाता है। इस प्रक्रिया को ‘फेज सेपरेशन’ कहा जाता है। एक बार ऐसा होने के बाद एथेनॉल दोबारा पेट्रोल में नहीं मिल पाता, जिससे पूरा ईंधन उपयोग के लायक नहीं रहता।
बताया जा रहा है कि बिलासपुर के कुछ पेट्रोल पंपों पर 2,000 से 5,000 लीटर तक पेट्रोल खराब हो गया है, जिससे संचालकों को लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
दूषित ईंधन बना इंजन के लिए बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पेट्रोल भरवाने के तुरंत बाद वाहन झटके लेने लगे, बंद हो जाए या सफेद धुआं छोड़ने लगे, तो यह पानी मिश्रित ईंधन का संकेत हो सकता है। चूंकि पेट्रोल पंप की मशीनें टैंक के सबसे निचले हिस्से से ईंधन खींचती हैं, इसलिए पानी घुसने पर पानी और एथेनॉल का मिश्रण सीधे वाहन के फ्यूल सिस्टम में पहुंच जाता है। इससे इंजन का कंबशन प्रभावित होता है और गंभीर स्थिति में इंजन सीज भी हो सकता है।
तेल कंपनियां कर रही हैं नुकसान का आकलन
बारिश के कारण हुए नुकसान का आकलन भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और एचपीसीएल जैसी तेल कंपनियां कर रही हैं। हालांकि, अभी तक कुल नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
जिला पेट्रोलियम डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष नवदीप अरोरा ने कहा कि लगातार बारिश के दौरान पेट्रोल पंपों के ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त रखना और स्टोरेज टैंकों की दिन में दो से तीन बार जांच करना आवश्यक है, ताकि पानी टैंकों में प्रवेश न कर सके।
वहीं, खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर ने बताया कि निजी पेट्रोल पंप अपने नुकसान का विवरण सीधे संबंधित तेल कंपनियों को भेजते हैं। इसलिए विभाग के पास फिलहाल यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि जिले में कुल कितने पंप प्रभावित हुए हैं।
बारिश के बाद सामने आई इस स्थिति ने पेट्रोल पंप संचालकों के साथ-साथ वाहन चालकों की भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि पेट्रोल भरवाने के बाद वाहन के प्रदर्शन में अचानक बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर में उसकी जांच कराई जाए।
