
शशि मिश्रा

बिलासपुर। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर 108 कलशों के पवित्र जल से महास्नान के बाद परंपरा के अनुसार 15 दिनों तक अनसर (विश्राम) अवधि में रहे भगवान जगन्नाथ मंगलवार को पूरी तरह स्वस्थ होकर नवयौवन स्वरूप में भक्तों के दर्शन दिए। नेत्रोत्सव के अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान की आंखों की पट्टी हटाकर काजल अर्पित किया गया और विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के नवयौवन दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

जगन्नाथ परंपरा के अनुसार महास्नान के बाद भगवान को ज्वर आने की मान्यता है। इसी कारण उन्हें 15 दिनों तक विश्राम कराया जाता है। इस दौरान काली मिर्च, अदरक सहित विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों से तैयार विशेष काढ़ा और भोग अर्पित कर उनकी सेवा की जाती है। उपचार अवधि पूरी होने के बाद नेत्रोत्सव के साथ भगवान के दर्शन कराए जाते हैं।

नेत्रोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को 501 फूलों की मालाओं, आकर्षक रंगोली और विशेष रोशनी से सजाया गया। मंदिर के शिखर पर भगवान के नेत्र स्वरूप माने जाने वाले ध्वज को भी बदला गया। पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ती रही और मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के उद्घोष से गूंजता रहा।
भव्य रथ तैयार, 16 जुलाई को निकलेगी रथयात्रा

मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष भगवान के लिए 16 फीट लंबा, 20 फीट ऊंचा और 12 फीट चौड़ा भव्य रथ तैयार किया गया है। रथ के गुंबद की ऊंचाई बढ़ाई गई है तथा सुरक्षा के लिए नया ब्रेक भी लगाया गया है। लगभग 101 फीट लंबी रस्सी से हजारों श्रद्धालु भगवान का रथ खींचेंगे। धार्मिक मान्यता है कि रथ की रस्सी खींचने वाले भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
15 जुलाई को रथ की प्राण-प्रतिष्ठा, 16 को निकलेगी रथयात्रा
15 जुलाई को भगवान के रथ की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न होगी। इसके बाद 16 जुलाई को दोपहर 2 बजे रेलवे क्षेत्र स्थित जगन्नाथ मंदिर से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा से पूर्व पारंपरिक छेरापहरा की रस्म एसईसीएल के निदेशक (तकनीकी, परियोजना एवं योजना) रमेशचंद्र मोहपात्रा निभाएंगे।
रथयात्रा रेलवे जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर तितली चौक, रेलवे स्टेशन, तारबाहर, गांधी चौक, तोरवा थाना और काली मंदिर मार्ग से होते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंचेगी। गुंडिचा मंदिर में 17 से 23 जुलाई तक प्रतिदिन शाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 24 जुलाई को बहुदा यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें पारंपरिक छेरापहरा की रस्म राजा गोपाल कृष्ण राय निभाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस यात्रा के साथ भगवान जगन्नाथ माता लक्ष्मी को मनाकर पुनः अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं।
