
आकाश दत्त मिश्रा

बिलासपुर।
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुई चोरी की घटना ने देशभर के करोड़ों रामभक्तों को गहरी पीड़ा पहुंचाई है। यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि उन असंख्य श्रद्धालुओं की भावनाओं पर आघात है जिन्होंने भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर को अपनी आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक माना है।

श्रीराम मंदिर का निर्माण केवल पत्थरों से नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा, समर्पण और जनसहभागिता से हुआ है। बिलासपुर शहर से लेकर जिले के गांव-गांव तक असंख्य परिवारों ने अपनी श्रद्धानुसार अंशदान देकर इस दिव्य मंदिर के निर्माण में सहभागिता निभाई थी। अनेक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन कर स्वयं को धन्य मान चुके हैं। ऐसे पावन धाम में हुई चोरी की घटना ने देशभर सहित छत्तीसगढ़ और बिलासपुर जिले के श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा आघात पहुंचाया है।
इसी जनभावना और भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए शनिवार, 11 जुलाई को दोपहर 3:00 बजे तिलक नगर हनुमान मंदिर से माँ महामाया मंदिर तक “श्रीराम श्रद्धा पदयात्रा” निकाली जाएगी।
यह पदयात्रा पूरी तरह श्रद्धा, आस्था और जनभावनाओं को समर्पित होगी। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि करना नहीं है। यह यात्रा किसी भी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा प्रकट करने, करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं के साथ एकजुटता व्यक्त करने तथा अयोध्या में हुई चोरी के दोषियों के विरुद्ध कठोर एवं शीघ्र कार्रवाई की मांग के लिए आयोजित की जा रही है।

हम शासन एवं संबंधित जांच एजेंसियों से मांग करते हैं कि इस घटना की त्वरित, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर दोषियों को कठोरतम दंड दिया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल की गरिमा, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने का दुस्साहस कोई न कर सके।
बिलासपुर जिले के सभी श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, युवाओं, मातृशक्ति एवं नागरिकों से विनम्र आग्रह है कि वे इस श्रद्धा पदयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। केवल तिलक नगर हनुमान मंदिर में ही एकत्र होने की आवश्यकता नहीं है। पदयात्रा जिस-जिस मार्ग से गुजरेगी, वहां के श्रद्धालु अपने-अपने मोहल्ले, वार्ड, चौक और क्षेत्र से इसमें शामिल होते जाएं तथा माँ महामाया मंदिर तक यात्रा का हिस्सा बनकर भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धा और एकजुटता का परिचय दें।
आइए, हम सब मिलकर यह संदेश दें कि भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था के केंद्र हैं। उनकी जन्मभूमि की गरिमा और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।

राम मंदिर में हुई चोरी निःसंदेह घोर और अपराध है लेकिन इस चोरी को लेकर जिस तरह से कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष अचानक से सनातनी और राम भक्त बन गए उससे सनातन समाज भी चकित है । जिस कांग्रेस ने प्रभु राम को काल्पनिक बताया और उनका अस्तित्व मानने तक से इनकार कर दिया । तुष्टिकरण की राजनीति में राम मंदिर केस में राम के खिलाफ वकीलों की फौज खड़ी कर दी और हर वह प्रयास किया जिससे राम मंदिर ना बन सके। राम मंदिर बनने के बाद भी कांग्रेसी नेताओं ने वहां दर्शन करने जाना तक उचित नहीं समझा। यहां तक कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन काले कपड़े पहनकर उसका विरोध किया और आज बंगाल चुनाव के नतीजे देखने के बाद अचानक सभी पार्टियों में सनातनी बनने की होड़ मची हुई है । ये सभी खुद को सबसे बड़ा राम भक्त बता रहे हैं , वे भी जिन्होंने राम भक्तों पर गोली चलाकर सरयू को उनके रक्त से लाल कर दिया था और वे भी जो रामसेतु मिटाने राम को काल्पनिक बताते रहे। जिनका मानना है कि बाबरी शहीद हुई है। जिनके नेताओं ने कहा कि वे सत्ता में आए तो दोबारा उस स्थान पर बाबरी मस्जिद बनाएंगे। कभी कहा कि राम मंदिर की जगह अस्पताल और शौचालय बनने चाहिए और आज वे इतने बड़े राम भक्त बन गए हैं कि मंदिर में हुई चोरी से उनकी भावनाएं आहत हो रही है और वे श्रद्धा यात्रा निकाल रहे हैं।

जनता समझती है कि यह सब कुछ चुनावी स्टंट है लेकिन सनातनी इतने बेवकूफ भी नहीं है कि इतिहास भूल जाए और अचानक इन कालनेमियों को राम भक्त समझ ले ।सनातनी समझते हैं कि कौन राम के साथ है और कौन राम के विरुद्ध ।मंदिर में हुई चोरी के दोषियों को कानून भी सजा देगी और भगवान श्री राम भी, लेकिन हनुमान जी ऐसे कालनेमियों को बक्शने वाले नहीं है और ना ही जनता उनको अब राम के नाम पर वोट देने वाली है।
