
बिलासपुर। नगर निगम की व्यापार विहार स्थित बेशकीमती जमीन के टेंडर से जुड़ा करीब दो साल पुराना विवाद एक वायरल वीडियो के बाद फिर चर्चा में आ गया है। वीडियो सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने मंगलवार को पूर्व संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को निलंबित कर दिया। यह इसी प्रकरण में उनका दूसरा निलंबन है। नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं, जो वायरल वीडियो की सत्यता, टेंडर प्रक्रिया और लगाए गए आरोपों की जांच करेगी।
क्या है पूरा मामला
विवाद मार्च 2024 में व्यापार विहार की लगभग 41 हजार वर्गफीट जमीन की बिक्री के लिए जारी किए गए टेंडर से जुड़ा है। आरोप है कि निगम ने जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में बेचने के बजाय एकमुश्त बेचने का निर्णय लिया, जिससे केवल बड़े खरीदार ही इसमें भाग ले सकें। उस समय क्षेत्र में जमीन का बाजार मूल्य करीब 10 हजार रुपये प्रति वर्गफीट बताया जा रहा था, जबकि टेंडर में इसकी दर लगभग 4500 रुपये प्रति वर्गफीट निर्धारित की गई थी।
इस पर आपत्तियां उठने के बाद तत्कालीन निगम आयुक्त अमित कुमार ने टेंडर निरस्त कर दिया था। इसी मामले में तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को भी निलंबित किया गया था।
वायरल वीडियो के बाद फिर उठे सवाल
हाल ही में करीब दो मिनट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें पूर्व संपदा अधिकारी राजेश देवांगन कथित रूप से गणेश ट्रेडर्स को टेंडर दिलाने के एवज में 1 करोड़ 15 लाख रुपये के लेन-देन का उल्लेख करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद निगम प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें दोबारा निलंबित कर दिया।
शिकायत में क्या लगाए गए हैं आरोप
कथित शिकायत के अनुसार, गणेश ट्रेडर्स के संचालक मोनू अग्रवाल को नगर निगम का टेंडर दिलाने के लिए तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने मुकेश पाठक के माध्यम से तत्कालीन महापौर रामशरण यादव से मुलाकात कराई थी। आरोप है कि महापौर निवास पर टेंडर को एमआईसी से मंजूरी दिलाने के बदले 1.15 करोड़ रुपये देने की सहमति बनी।
शिकायत में दावा किया गया है कि यह राशि किस्तों में दी गई। पहले 50 लाख रुपये, फिर 50 लाख रुपये, इसके बाद 12 लाख रुपये और अंत में महापौर के कहने पर मुकेश पाठक के माध्यम से 3 लाख रुपये दिए गए। आरोपों के अनुसार, इस दौरान मुकेश पाठक पूरी प्रक्रिया में मौजूद था।
हालांकि एमआईसी से टेंडर को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन बाद में तत्कालीन कलेक्टर ने इस पर रोक लगा दी। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां यह अभी भी लंबित है।
जांच के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति
नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की है। समिति वायरल वीडियो की प्रमाणिकता, टेंडर प्रक्रिया में हुई कार्रवाई और लगाए गए आरोपों की विस्तार से जांच करेगी।
राजेश देवांगन ने बताया वीडियो फर्जी
पूर्व संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने वायरल वीडियो को पूरी तरह एडिटेड और फर्जी बताया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले में पुलिस अधीक्षक को कोई शिकायत नहीं दी है और सोशल मीडिया पर उनके नाम से प्रसारित शिकायत भी गलत है। उनका कहना है कि उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से वीडियो वायरल किया गया है और इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।
पूर्व महापौर ने आरोपों से किया इनकार
पूर्व महापौर रामशरण यादव ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत पहले भी पुलिस और प्रशासन के समक्ष की जा चुकी है तथा जांच में भ्रष्टाचार का कोई मामला सामने नहीं आया था।
महापौर पूजा विधानी का बयान
वर्तमान महापौर पूजा विधानी ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में जमीन और टेंडर से जुड़े कई मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। ऐसे सभी मामलों की फाइलें दोबारा खोली जाएंगी। विशेष जांच टीम गठित कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल वायरल वीडियो और कथित शिकायत के आधार पर मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और उनकी सत्यता का निर्धारण जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
