
बिलासपुर। शहर के अपोलो अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन अब भी नहीं हो सका है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इलाज के लिए आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शासन की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ जिले के कई निजी अस्पतालों में मिल रहा है, लेकिन अपोलो अस्पताल में अधिकांश गंभीर बीमारियों के मरीज अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं।
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला की पहल के बाद अस्पताल प्रबंधन ने केवल कैंसर मरीजों के इलाज के लिए आयुष्मान योजना लागू करने पर सहमति जताई है, लेकिन इसकी शुरुआत अभी तक नहीं हो सकी है। वहीं हार्ट, किडनी, लीवर, ऑर्थोपेडिक, गायनी सहित अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार को लेकर अस्पताल प्रबंधन और शासन के बीच सहमति नहीं बन पाई है।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अपोलो अस्पताल में इलाज का खर्च सामान्य और गरीब परिवारों की पहुंच से बाहर है। ऐसे में आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिलने से कई मरीज मजबूरी में दूसरे अस्पतालों का रुख कर रहे हैं या इलाज टालने को विवश हैं। लोगों का कहना है कि जब अन्य निजी अस्पताल इस योजना के तहत उपचार उपलब्ध करा रहे हैं, तो अपोलो अस्पताल भी सभी प्रमुख बीमारियों के लिए यह सुविधा शुरू करे।
अपोलो अस्पताल को शासन द्वारा लीज पर जमीन उपलब्ध कराई गई है। ऐसे में लोगों का मानना है कि अस्पताल की सामाजिक जिम्मेदारी भी है कि वह गरीब वर्ग के मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत उपचार उपलब्ध कराए।
आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं किए जाने के मामले में कलेक्टर संजय अग्रवाल अस्पताल प्रबंधन को तलब कर चुके हैं। बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से पूछा था कि जब अस्पताल योजना में सूचीबद्ध है तो आयुष्मान कार्डधारकों का इलाज क्यों नहीं किया जा रहा है। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने तर्क दिया था कि आयुष्मान योजना के तहत निर्धारित पैकेज दरें काफी कम हैं और इन दरों पर गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना आर्थिक रूप से संभव नहीं है।
इधर, विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि लगातार प्रयासों के बाद कैंसर मरीजों के लिए आयुष्मान योजना लागू करने पर सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि हार्ट और किडनी सहित अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज को भी योजना के दायरे में लाने के लिए अस्पताल प्रबंधन से चर्चा जारी है। उनका कहना है कि गरीब मरीजों को राहत देने के लिए अपोलो अस्पताल में सभी प्रमुख बीमारियों के उपचार पर आयुष्मान योजना लागू होना आवश्यक है।
